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State Teachers Association: शिमला में नरोत्तम वर्मा ने उठाई शिक्षकों के महंगाई भत्ते, एरियर और पदोन्नति की मांग..!

State Teachers Association: शिमला में नरोत्तम वर्मा ने उठाई शिक्षकों के महंगाई भत्ते, एरियर और पदोन्नति की मांग..!

State Teachers Association: राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष नरोत्तम वर्मा ने शुक्रवार को शिमला में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश सरकार से शिक्षकों की लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि संघ जल्द ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर इन मुद्दों को उठाएगा।

नरोत्तम वर्मा ने बताया कि शिक्षकों को वर्ष 2016 से महंगाई भत्ते (DA) का एरियर अभी तक नहीं मिला है। इसके साथ ही छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार बकाया एरियर का भुगतान भी लंबित है। उन्होंने सरकार से इस बकाया राशि को शीघ्र जारी करने की मांग की।

वर्मा ने शिक्षकों की पदोन्नति में देरी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जेबीटी से टीजीटी और हेडमास्टर से प्रिंसिपल जैसी पदोन्नतियां वर्षों से अटकी हुई हैं, जिससे शिक्षकों में भारी असंतोष है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समयबद्ध पदोन्नति न केवल शिक्षकों का अधिकार है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता के लिए भी आवश्यक है।

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स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति की मांग

अध्यापक संघ ने प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के नए अध्यक्ष की तत्काल नियुक्ति की मांग भी उठाई। वर्मा ने कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्रों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है, जिसका असर सरकारी स्कूलों की साख पर पड़ रहा है।

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गैर-शिक्षकीय कार्यों पर रोक की मांग

नरोत्तम वर्मा ने शिक्षकों से गैर-शिक्षकीय कार्य लेने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सरकारी योजनाओं, सर्वेक्षणों और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाना छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने मांग की कि शिक्षकों को केवल शिक्षण कार्य तक सीमित रखा जाए।

धरने पर बैठे शिक्षकों का समर्थन

वर्मा ने धरने पर बैठे प्राथमिक शिक्षकों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार से इन्हें शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इन मांगों को नजरअंदाज करने से छात्रों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ सकता है।

संघ की गुटबाजी पर सवाल

पत्रकार वार्ता के दौरान वर्मा ने राजकीय अध्यापक संघ के भीतर गुटबाजी के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उनका गुट ही मान्यता प्राप्त है, जबकि वीरेंद्र चौहान गुट को निष्कासित कर दिया गया है। उन्होंने चौहान को “स्वयंभू नेता” करार देते हुए उन पर कई सवाल उठाए।

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