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Monsoon Session: कान खोलके सुन लें विपक्ष, PM मोदी और ट्रंप के बीच नहीं हुई कोई बात..

Monsoon Session: कान खोलके सुन लें विपक्ष, PM मोदी और ट्रंप के बीच नहीं हुई कोई बात..

Parliament Monsoon Session: संसद में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर जोरदार बहस जारी है। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष लगातार डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार हर सवाल का दृढ़ता से जवाब दे रही है। इस बीच, बुधवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने विपक्ष पर तीखा प्रहार किया।

डॉ. जयशंकर ने कहा, “मैं विपक्ष से कहना चाहता हूं कि ध्यान से सुन लें—22 अप्रैल से 16 जून तक राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच एक भी फोन कॉल नहीं हुआ।” उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जब यह अभियान शुरू हुआ, तो कई देशों ने स्थिति की गंभीरता और अवधि जानने के लिए संपर्क किया।

भारत ने सभी को एकसमान जवाब दिया कि वह किसी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा और पाकिस्तान का कोई समझौता केवल द्विपक्षीय स्तर पर होगा। हम पाकिस्तानी आक्रमण का जवाब दे रहे हैं और देते रहेंगे। यदि लड़ाई रुकनी है, तो पाकिस्तान को डीजीएमओ के जरिए अनुरोध करना होगा।”

ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में अमेरिका के साथ संवाद पर डॉ. जयशंकर ने उल्लेख किया, “9 मई को अमेरिकी उपराष्ट्रपति वेंस ने प्रधानमंत्री को फोन कर चेतावनी दी कि कुछ घंटों में पाकिस्तान हमला कर सकता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी घटना का माकूल जवाब दिया जाएगा। ऐसा हुआ, और हमारी कार्रवाई से पाकिस्तान की वायु रक्षा और हवाई अड्डे निष्क्रिय हो गए।

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इसके बाद पाकिस्तान ने लड़ाई रोकने की इच्छा जताई, लेकिन हमने हर संपर्क में यही कहा कि अनुरोध डीजीएमओ के माध्यम से आना चाहिए। दुनिया में कोई भी नेता नहीं था, जिसने भारत से अभियान रोकने को कहा हो। न ही यह व्यापार से जुड़ा था, और न ही ट्रंप से कोई बात हुई।”

राज्यसभा में सिंधु जल संधि पर चर्चा के दौरान डॉ. जयशंकर ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “सिंधु जल संधि एक अनोखा समझौता है। मुझे विश्व में ऐसा कोई उदाहरण नहीं मिलता, जहां किसी देश ने अपनी मुख्य नदियों को दूसरे देश में बिना अधिकार के बहने दिया हो। इसे स्थगित करना एक ऐतिहासिक कदम था, और इसके इतिहास को समझना जरूरी है। कुछ लोग इतिहास से कतराते हैं और उसे भूल जाना चाहते हैं, शायद क्योंकि यह उनके लिए सुविधाजनक नहीं है।”

Kasauli International Public School, Sanwara (Shimla Hills)
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