Share Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जबरदस्त गिरावट देखी गई। ख़बर लिखे जाने तक सेंसेक्स 1,953 अंकों यानी 2.54 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 74,751 के स्तर पर चल रहा है। निफ्टी भी 580 अंकों के नुकसान के साथ 23,200 से नीचे चला गया। पिछले तीन दिनों से बाजार में चल रही तेजी आज पूरी तरह रुक गई। इस एक दिन की गिरावट से निवेशकों के करीब 9 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी जोरदार बिकवाली हुई। ये इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत तक नीचे आए। निफ्टी के सभी 16 सेक्टर रेड जोन में रहे। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर के शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जहां गिरावट 3 प्रतिशत तक पहुंच गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आज की इस बड़ी गिरावट के पीछे सात मुख्य वजहें रहीं।
पहली वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव 111 डॉलर तक पहुंच गया। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा कि भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए यह बहुत बुरी खबर है। अगर तेल की कीमतें 110 डॉलर से ऊपर लंबे समय तक बनी रहीं तो अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।
दूसरी वजह कमजोर वैश्विक संकेत हैं। एशियाई बाजारों में भी आज भारी दबाव रहा। जापान का निक्केई, चीन का शंघाई, हांगकांग का हैंग सेंग और साउथ कोरिया का कोस्पी सभी नीचे कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार पिछले दिन तेज गिरावट के साथ बंद हुए थे। गिफ्ट निफ्टी में भी 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई।
तीसरी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान ने इलाके की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले किए और साउथ पार्स गैस क्षेत्र पर कार्रवाई की, जिससे अमेरिका-इजरायल के साथ तनाव बढ़ गया। इससे कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति पर चिंता बढ़ी और निवेशक जोखिम से बचने लगे।
चौथी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली है। विदेशी फंड (एफआईआई) बुधवार को 2,714 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेच चुके थे। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि यह रिस्क से दूर होने की रणनीति दिखाती है और लगातार पूंजी निकासी से बाजार की स्थिरता प्रभावित हो रही है।
पांचवीं वजह अमेरिकी फेड का सख्त रवैया है। फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरें नहीं घटाईं और महंगाई पर कड़ा रुख अपनाया। इस साल ब्याज दर कटौती की संभावना कम बताई गई। फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि वैश्विक हालात से आर्थिक स्थिति बहुत अनिश्चित बनी हुई है। ऊंची ब्याज दरों से उभरते बाजारों जैसे भारत में निवेश कम आकर्षक हो जाता है।
छठी वजह HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट है। बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद शेयर 9 प्रतिशत तक लुढ़क गया। यह पिछले दो साल से ज्यादा समय में इस शेयर की सबसे बड़ी एकदिन की गिरावट थी। बैंक निफ्टी भी 3 प्रतिशत गिरा। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बैंक के कॉरपोरेट गवर्नेंस पर सवाल उठे और निवेशकों का भरोसा डगमगा गया।
सातवीं वजह इंडिया VIX में तेज बढ़ोतरी है। यह डर का सूचकांक 16 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 21.72 पर पहुंच गया। इससे पता चलता है कि आने वाले दिनों में बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव रह सकता है।
टेक्निकल विश्लेषण की बात करें तो जियोजित के चीफ मार्केट स्ट्रैटेजिस्ट आनंद जेम्स ने कहा कि तीन दिनों में 900 अंकों की तेजी के बाद अब बाजार थकान दिखा रहा है। निफ्टी अगर 23,111 से नीचे जाता है तो और गिरावट हो सकती है। वहीं 23,450 के ऊपर टिकने पर ही मजबूती के संकेत मिलेंगे। बता दें कि आज की इस गिरावट ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया है और बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।


















