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IAS Rohini Sindhuri Case: ₹13 का बैग और ₹52 का बिल, मुश्किल में फंसीं IAS रोहिणी सिंधुरी – हाईकोर्ट ने मुकदमा चलाने की दी मंजूरी

Karnataka High Court order Rohini Sindhuri: कर्नाटक हाईकोर्ट ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंधुरी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए अभियोजन की मंजूरी दे दी है। ₹13 का बैग और ₹52 का बिल लगा कर 7 करोड़ के घोटाले का आरोप ।
IAS Rohini Sindhuri Case: ₹13 का बैग और ₹52 का बिल, मुश्किल में फंसीं IAS रोहिणी सिंधुरी - हाईकोर्ट ने मुकदमा चलाने की दी मंजूरी

IAS Rohini Sindhuri Case: कर्नाटक की चर्चित आईएएस अधिकारी रोहिणी सिंधुरी एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं और इस बार मामला सीधे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और अदालत की सख्ती से जुड़ा है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह 2009 बैच की वरिष्ठ अधिकारी रोहिणी सिंधुरी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दे, ताकि उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।

मामला साल 2021 का है जब रोहिणी मैसूर की डिप्टी कमिश्नर (DC) के पद पर तैनात थीं। आरोप है कि उस दौरान सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के लिए खरीदे गए ईको-फ्रेंडली बैग्स में सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई गई। पूरे मामले की जड़ में वो बैग्स हैं जिनकी बाजार में कीमत महज ₹13 थी, लेकिन उन्हें कर्नाटक हैंडलूम डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (KHDC) से कथित तौर पर ₹52 की ऊंची दर पर खरीदा गया।

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वकील और सामाजिक कार्यकर्ता एनआर रविचंद्रे गौड़ा ने इस पूरे सौदे को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें दावा किया गया है कि इस ‘झोल’ की वजह से सरकार को लगभग ₹7.5 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। भ्रष्टाचार के इन आरोपों की गूँज जब एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) तक पहुँची, तो मामला कानूनी दांव-पेच में उलझ गया।

हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार ने शुरुआत में रोहिणी सिंधुरी का बचाव करते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जांच की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। साल 2022 और फिर मई 2025 में भी सरकार ने अपने पुराने स्टैंड को बरकरार रखा, जिससे नाराज होकर मामला हाईकोर्ट की दहलीज तक जा पहुंचा।

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जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने सरकार के टालमटोल वाले रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि न्याय के हित में इस मामले को और लंबा खींचना सही नहीं है। अदालत ने साफ कर दिया कि जब आरोपों के समर्थन में पुख्ता सामग्री मौजूद हो, तो जांच को शुरुआती स्तर पर ही दबाया नहीं जा सकता।

कोर्ट ने इस दौरान एक अहम कानूनी बारीकी को भी स्पष्ट किया कि विभागीय क्लीन चिट मिलने का मतलब यह कतई नहीं है कि किसी अधिकारी पर आपराधिक केस नहीं चल सकता। रोहिणी सिंधुरी, जो अपने तेज-तर्रार अंदाज और कड़े फैसलों के लिए जानी जाती हैं, अब जांच एजेंसियों के घेरे में होंगी।

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हैदराबाद की जेएनटीयू यूनिवर्सिटी से बी.टेक करने वाली सिंधुरी का करियर जितना प्रभावशाली रहा है, विवादों से उनका नाता भी उतना ही गहरा रहा है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार पर टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट के आदेश के बाद जांच का पहिया घूमने के साथ ही यह तय होगा कि करोड़ों के इस घोटाले में असलियत क्या है।

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