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हिमाचल पुलिस में मचे घमासान पर जयराम का सुक्खू सरकार पर बड़ा हमला, CM की चुप्पी को बताया घातक

हिमाचल प्रदेश पुलिस में वरिष्ठ अधिकारियों और डीजीपी के बीच बढ़ता विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हिमाचल पुलिस में मचे घमासान पर जयराम ठाकुर का सुक्खू सरकार पर बड़ा हमला, कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

Himachal Pradesh Police Controversy: हिमाचल प्रदेश पुलिस सेवा (HPS) एसोसिएशन की हालिया बैठक में पारित एक प्रस्ताव ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस प्रस्ताव में हिमाचल प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एसोसिएशन ने डीजीपी द्वारा शिमला के डीएसपी हेडक्वार्टर विजय रघुवंशी के खिलाफ की गई कार्रवाई को अनुचित और मनमाना करार दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, विवाद की जड़ डीएसपी की आधिकारिक गाड़ी छीना जाना है। आरोप है कि डीजीपी ने केवल इसलिए गाड़ी वापस ले ली क्योंकि डीएसपी ने उस वाहन में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को लिफ्ट दी थी, जिनसे डीजीपी की निजी रंजिश बताई जा रही है। एसोसिएशन ने इस घटना को पुलिस बल के मुखिया के पद पर बैठे व्यक्ति का ‘बचकाना और तानाशाही भरा’ रवैया करार दिया है।

एसोसिएशन के प्रस्ताव में सीधे तौर पर कहा गया है कि डीजीपी का यह व्यवहार न केवल पुलिस बल के अनुशासन के लिए खतरनाक है, बल्कि यह नेतृत्व के गुणों में गंभीर कमी को दर्शाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डीजीपी को अपने निजी हितों या रंजिशों को वर्दी की मर्यादा और विभाग के मनोबल के ऊपर नहीं रखना चाहिए।

आरोपों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। एसोसिएशन ने दावा किया है कि पिछले कुछ महीनों में डीजीपी ने कई ऐसे ‘तुगलकी’ आदेश दिए हैं जो पुलिस की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहे हैं। इनमें एसएचओ (SHO) और एसडीपीओ (SDPO) को मीडिया से बात करने से रोकना और महिला कांस्टेबलों के साथ कथित रूप से परेशान करने वाला व्यवहार शामिल है।

एसोसिएशन ने चिंता व्यक्त की है कि इस तरह के आंतरिक विवादों का सीधा असर राज्य की कानून-व्यवस्था पर पड़ रहा है। ड्रग माफिया पर नकेल कसने में पुलिस के प्रदर्शन में कमी और आम जनता को मिलने वाली सेवाओं पर इसका नकारात्मक असर देखा जा रहा है। एचपीएस एसोसिएशन का मानना है कि हिमाचल पुलिस अपनी ईमानदारी और अनुशासन के लिए जानी जाती है, जिसे ऐसी तानाशाही कार्यशैली से नुकसान पहुंच रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार को निशाने पर लिया है। उन्होंने पुलिस महकमे के भीतर जारी इस विवाद को सरकार की ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की विफलता के रूप में देखा है। ठाकुर ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और पुलिस बल में फैले असंतोष को दूर करने की मांग की है।

इस मामले पर जयराम ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है कि “व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर कुछ तो व्यवस्थिति रहने दीजिए। मुख्यमंत्री का इस क़दर आँखें मूँद लेना बहुत घातक होगा। प्रदेश के लोग त्रस्त हैं। क़ानून व्यवस्था रसातल में चली गई है। प्रशासनिक अधिकारी आपस में कीचड़ उछाल रहे हैं। पुलिस अधिकारी आपस में लड़ रहे हैं।”

उन्होंने  आगे लिखा ,” मुख्यमंत्री जी झूठ का पुलिंदा लेकर बिहार-आसाम के बाद बंगाल गए हैं। मुख्यमंत्री की यह बेबसी और मौन प्रदेश पर बहुत भारी पड़ रहा है। हर जगह वायरल हो रहा यह पत्र बाक़ी कहानी स्वयं कह रहा है। इस तरह के शब्द, ऐसी भाषा, आख़िर यह चल क्या रहा है?”

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