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सुप्रीम कोर्ट की नई ICU गाइडलाइंस, अब हर अस्पताल को पूरा करना होगा ये पैमाना

Supreme Court ICU Norms: देश के सभी अस्पतालों में आईसीयू की गुणवत्ता सुधारने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए न्यूनतम मानक तय कर दिए हैं, जिसका पालन करना सभी राज्यों के लिए अब जरूरी होगा।
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Supreme Court New ICU Guidelines India: सुप्रीम कोर्ट ने देश भर के अस्पतालों में गहन चिकित्सा इकाई (ICU) के संचालन के लिए एक सख्त और व्यापक ढांचा तैयार किया है। शीर्ष अदालत द्वारा गठित एक विशेषज्ञ समिति ने आईसीयू के लिए न्यूनतम मानक निर्धारित किए हैं, जिसमें बुनियादी ढांचे, उपकरणों की उपलब्धता और स्टाफिंग के सख्त नियम शामिल हैं। यह कदम चिकित्सा सेवाओं में एकरूपता लाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने इस मामले में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने संबंधित सरकारों से कहा है कि वे इन नए मानकों के आधार पर अपने यहां मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करें और किसी भी कमी की पहचान कर उसे दूर करने की विस्तृत कार्ययोजना 18 मई तक जमा करें।

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बुनियादी ढांचे और उपकरणों की अनिवार्यता
सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार की गई “गाइडलाइन्स फॉर द ऑर्गेनाइजेशन एंड डिलीवरी ऑफ इंटेंसिव केयर सर्विसेज” रिपोर्ट के अनुसार, एक मानक आईसीयू में विशिष्ट बुनियादी सुविधाएं होना अनिवार्य है। अस्पताल को यह सुनिश्चित करना होगा कि आईसीयू का स्थान सुरक्षित हो और वहां आपातकालीन सेवाओं, ऑपरेशन थिएटर और प्रयोगशालाओं तक त्वरित पहुंच हो। इसके अलावा, बिजली का बैकअप, उचित स्वच्छता और सही लेआउट (Layout) को आधारभूत मानकों में रखा गया है।

बेड के पास आवश्यक सुविधाओं में ऑक्सीजन की आपूर्ति, सक्शन और इलेक्ट्रिकल पॉइंट्स का होना अनिवार्य किया गया है। जीवन रक्षक उपकरणों की सूची में वेंटिलेटर, मॉनिटर, डिफाइब्रिलेटर, क्रैश कार्ट, इन्फ्यूजन और सिरिंज पंप, ग्लूकोमीटर और ईसीजी मशीनें शामिल हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये उपकरण किसी भी आईसीयू के लिए न्यूनतम आवश्यकताएं हैं, जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता।

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स्टाफिंग और डॉक्टर-नर्स अनुपात
आईसीयू संचालन में स्टाफिंग को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। नए मानदंडों के अनुसार, आईसीयू का नेतृत्व प्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा किया जाना चाहिए और वहां चौबीसों घंटे स्टाफ मौजूद होना चाहिए। नर्सिंग स्टाफ की भूमिका को विशेष प्राथमिकता दी गई है। साधारण वार्ड की तुलना में आईसीयू में नर्स-टू-पेशेंट अनुपात अधिक रखा गया है। सामान्य मरीजों के लिए यह अनुपात 1:2 से 1:3 के बीच होगा, जबकि गंभीर या वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों के लिए 1:1 का अनुपात अनिवार्य है। इसके अलावा, सहायक स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक महाजन इमेजिंग लैब के अध्यक्ष डॉ. हर्ष महाजन ने बताया कि ये गाइडलाइन ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में मौजूद कमियों को भी पहचानती हैं। इसे सुधारने के लिए छोटे आईसीयू को टेली-आईसीयू या ई-आईसीयू के माध्यम से बड़े केंद्रों से जोड़ने का सुझाव दिया गया है।

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सर गंगाराम अस्पताल के डॉ. सौमित्र रावत के अनुसार, नई गाइडलाइन में आईसीयू को अलग-अलग स्तरों में बांटा गया है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि शुरुआती स्तर के आईसीयू को भी निर्धारित मानदंडों का पालन करना ही होगा। अदालत ने इन मानकों को लागू करने की प्रक्रिया पर नजर रखने और निगरानी तंत्र बनाने का भी निर्देश दिया है

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