Shimla Lawyers Protest: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में प्रतिबंधित मार्गों पर पुलिस प्रशासन की ओर से की जा रही सख्ती के विरोध में मंगलवार को अधिवक्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ताओं ने पहले मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी बात रखने का प्रयास किया। हालांकि, मुख्यमंत्री से मुलाकात संभव नहीं हो सकी, जिसके बाद आक्रोशित अधिवक्ताओं ने सचिवालय के बाहर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए वहां चक्का जाम भी कर दिया।
सचिवालय के बाहर किए गए इस अचानक चक्का जाम के कारण शिमला की मुख्य सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। इस विरोध प्रदर्शन की वजह से आम नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों और बाहरी क्षेत्रों से आए यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। यातायात पूरी तरह बाधित होने से कई वाहन लंबे समय तक सड़क पर फंसे रहे, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधि सीएस ठाकुर ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर पुलिस द्वारा हाल ही में की जा रही सख्ती के कारण उन्हें न्यायालय पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिवक्ताओं का पेशा पूरी तरह समयबद्ध होता है और अदालत में निर्धारित समय पर उपस्थित होना बेहद आवश्यक होता है। पुलिस द्वारा लागू की गई इस नई व्यवस्था के कारण उनके रोजमर्रा के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
अधिवक्ताओं ने सरकार और जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि उन्हें प्रतिबंधित मार्गों पर पहले की तरह ही वाहनों की आवाजाही करने की अनुमति दी जाए। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से उनकी गाड़ियां इन प्रतिबंधित मार्गों से होकर बिना किसी बाधा के हाईकोर्ट तक जाती रही हैं और पहले कभी इस प्रकार की रोक-टोक नहीं की गई थी।
अधिवक्ताओं के अनुसार, अब अचानक पुलिस द्वारा छोटा शिमला से हाईकोर्ट की ओर जाने वाले मार्ग पर उनके वाहनों को रोका जा रहा है, जिससे उन्हें दूसरे वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं ने बताया कि कार्ट रोड सहित अन्य जितने भी वैकल्पिक मार्ग हैं, उन पर अक्सर भारी जाम लगा रहता है। ऐसे में इन रास्तों से होकर अदालत पहुंचने में उन्हें बहुत अधिक समय लग जाता है, जिसका सीधा असर न्यायिक कार्यों पर पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया और उन्हें पुराना अधिकार वापस नहीं मिला, तो इस आंदोलन को आने वाले दिनों में और अधिक तेज किया जाएगा। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन वकीलों के इस कड़े रुख से न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में तनाव बढ़ गया है।

















