Himachal Politics News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। जिला परिषद मंडी में भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक बिसात पर सत्ताधारी विपक्षी दल कांग्रेस के खेमे को पूरी तरह चारों खाने चित कर दिया है। इस नए घटनाक्रम के बाद जिला परिषद में भाजपा का कुनबा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है।
बता दें कि पार्टी से किन्हीं कारणों से छिटके चार असंतुष्ट सदस्यों ने फिर से भाजपा का दामन थाम लिया है। इन चारों सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में अपनी पूरी निष्ठा और विश्वास जताया है। इस ताजा राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अब 36 सदस्यीय मंडी जिला परिषद के भीतर समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। परिषद में भाजपा समर्थित सदस्यों का आंकड़ा अब 25 से बढ़कर सीधे 29 पर पहुंच गया है।
इस संख्या बल के साथ जिला परिषद के भीतर भाजपा का दुर्ग अब और भी अभेद्य हो गया है, जिसे भेद पाना सत्ताधारी कांग्रेस के लिए लगभग असंभव नजर आ रहा है। इन सभी सदस्यों की घर वापसी को क्षेत्र में भाजपा की एक बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा के कुनबे को मजबूती देने वाले इन सदस्यों में लांगणा वार्ड से जिला परिषद सदस्य राखी, भाबंला से अभिलाषा ठाकुर, डलाह से चंपा और गोड़ागागल से अनिल कुमार उर्फ डिंपल सैनी शामिल हैं। इन चारों नेताओं ने भाजपा की मूल रीति-नीति और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व को सर्वोपरि मानते हुए संगठन के साथ आगे चलने का अंतिम फैसला किया। इन सभी सदस्यों का वापस आना पार्टी के भीतर उनके पुराने जुड़ाव और नेतृत्व के प्रति भरोसे को दर्शाता है।
इस पूरे विवाद और अलगाव की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो इनमें से तीन सदस्य अभिलाषा ठाकुर, चंपा और अनिल कुमार जिला परिषद चुनाव के समय से ही भाजपा टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। हालांकि, उस समय किन्हीं वजहों से बात नहीं बन पाई थी और पार्टी से दूरियां बढ़ गई थीं। यहां तक कि पार्टी ने डलाह वार्ड से चंपा को पहले अपना आधिकारिक टिकट दिया था, लेकिन बाद में कुछ राजनीतिक समीकरणों के चलते उनका टिकट काट दिया गया था, जिससे वे नाराज चल रही थीं।
दूसरी ओर, लांगणा वार्ड की सदस्य राखी की कहानी थोड़ी अलग है। उन्होंने चुनाव के दौरान हालांकि भाजपा टिकट के लिए कोई औपचारिक आवेदन नहीं किया था और निर्दलीय ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था, लेकिन उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि पूरी तरह से भाजपा विचारधारा से जुड़ी रही है। ऐसे में चुनाव के बाद उनकी यह घर वापसी राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा बेहद स्वाभाविक और तय मानी जा रही थी।
इन चारों असंतुष्टों के दोबारा भाजपा के साथ आने से जिला परिषद मंडी के भीतर कांग्रेसी खेमे की रीढ़ पूरी तरह टूट चुकी है। अब 36 सदस्यीय इस सदन में सत्ताधारी कांग्रेस बेहद कमजोर स्थिति में आ गया है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो परिषद में अब कांग्रेस समर्थित केवल चार सदस्य ही बचे हैं। इनके अलावा सदन में निर्दलीय एक और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के दो सदस्य निर्वाचित हुए हैं, जो भाजपा के इस भारी बहुमत के सामने बेअसर साबित हो रहे हैं।

















