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500 करोड़ के क्रिप्टो घोटाले में ED ने शिमला से दबोचा मुख्य आरोपी का ‘राजदार’, 2.5 लाख लोग हुए थे ठगी के शिकार!

Cryptocurrency Fraud: प्रवर्तन निदेशालय ने हिमाचल और पंजाब में फैले ₹500 करोड़ के कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में सोमवार को शिमला से मासूम जुनेजा को गिरफ्तार कर लिया, जो मुख्य आरोपी का करीबी मददगार था।
Himachal Cryptocurrency Scam: 500 करोड़ का क्रिप्टो घोटाले में ED ने शिमला से दबोचा मुख्य आरोपी का 'राजदार', 2.5 लाख लोग हुए थे ठगी के शिकार!

Himachal Cryptocurrency Scam: प्रवर्तन निदेशालय ने हिमाचल प्रदेश और पंजाब में सक्रिय करीब 500 करोड़ रुपये के कथित क्रिप्टोकरेंसी घोटाले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी की टीम ने सोमवार को इस नेटवर्क पर कड़ा प्रहार करते हुए शिमला में विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस सघन तलाशी अभियान के दौरान ईडी के हाथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय अभिलेख लगे हैं, जिन्हें तुरंत जब्त कर लिया गया।

छापेमारी के बाद लंबी पूछताछ और मिले सबूतों के आधार पर ईडी ने मुख्य आरोपी सुभाष का वित्तीय मददगार और राजदार माने जाने वाले मासूम जुनेजा को धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद से फर्जी डिजिटल करेंसी नेटवर्क से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 में मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा ने हेमराज, सुखदेव ठाकुर, अभिषेक शर्मा और राधिका शर्मा के साथ मिलकर इस पोंजी स्कीम योजना की शुरुआत की थी। शुरुआती चरण में आरोपियों ने एक ऑनलाइन मंच के माध्यम से आम लोगों से निवेश जुटाना शुरू किया। इसके बाद पूरे नेटवर्क को डिजिटल ओशन के विदेशी सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके संचालन के लिए कई फर्जी डोमेन का उपयोग किया जा रहा था। आरोपियों ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कोर्वियो सिक्का नामक एक डिजिटल टोकन पेश किया और इसमें निवेश पर भारी मुनाफे का दावा किया।

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भोले-भाले निवेशकों को जाल में फंसाने के लिए आरोपियों ने देशभर में भ्रामक संगोष्ठियां और बड़े स्तर पर प्रचार अभियान चलाए। इस सुनियोजित नेटवर्क के जरिये लगभग 2.48 लाख लोगों को इस फर्जी डिजिटल करेंसी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।

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ईडी की जांच के अनुसार, इस योजना से जुड़ी कुल लेनदेन राशि 219 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक पाई गई है, जिसका भारतीय मूल्य लगभग 500 करोड़ रुपये बैठता है। मासूम जुनेजा की गिरफ्तारी के बाद अब ईडी जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों, बैंकिंग अभिलेखों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कर रही है।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरी धोखाधड़ी एक क्लासिक पोंजी संरचना पर आधारित थी। इसमें नए निवेशकों से प्राप्त होने वाले धन का उपयोग पुराने निवेशकों को रिटर्न या भुगतान करने के लिए किया जाता था। जैसे-जैसे निवेशकों की संख्या बढ़ती गई, वैसे-वैसे इस अवैध नेटवर्क का आकार भी फैलता गया।

हलांकि जब बाजार में शिकायतें बढ़ने लगीं, तो आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से अपने डिजिटल निशान मिटाने शुरू कर दिए, जिसके तहत कई महत्वपूर्ण अभिलेख और डोमेन तक हटा दिए गए। मामला पूरी तरह उजागर होने के बाद मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा भारत छोड़कर दुबई भाग गया, जहां से वह फिलहाल अपने नेटवर्क को संचालित कर रहा है।

इस मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच के दौरान ईडी को कई पुख्ता सबूत मिले कि ठगी से अर्जित की गई रकम का एक बड़ा हिस्सा विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा तक पहुंचाया जाता था। अधिनियम की धारा 50 के तहत दर्ज किए गए बयानों में यह तथ्य स्पष्ट रूप से सामने आया कि सुभाष शर्मा की ओर से बड़ी मात्रा में नकद राशि इन दोनों तक पहुंचाई गई थी। इस अवैध धन का उपयोग देश के विभिन्न हिस्सों में अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया।

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पकड़े जाने से बचने के लिए कई मामलों में इन संपत्तियों की रजिस्ट्री वास्तविक कीमत से काफी कम मूल्य पर करवाई गई, जबकि बाकी का शेष भुगतान नकद में किया गया ताकि अवैध काली कमाई को वैध दिखाया जा सके। इतना ही नहीं, जुनेजा परिवार कई ऐसे बैंक खातों में नामित व्यक्ति बना हुआ था जो असल में उनके कर्मचारियों के नाम पर खोले गए थे। इन खातों का वास्तविक नियंत्रण पूरी तरह से विजय कुमार जुनेजा और मासूम जुनेजा के पास था और इनका इस्तेमाल अपराध से अर्जित आय को छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था।

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