Solan News: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के तहत पट्टा महलोग क्षेत्र में सरकारी विभागों की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। सरकारें बुनियादी ढांचे के विकास, सड़कों के आधुनिकीकरण और चौड़ीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च करती हैं ताकि आम जनता का सफर सुरक्षित और सुगम हो सके। हालांकि, धरातल पर बैठे अधिकारियों की घोर लापरवाही और उदासीनता के कारण इस विकास कार्य पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
ऐया ही एक मामला पट्टा महलोग से गोयला को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर देखने को मिल रहा है जहां इस समय आम जनता की सुरक्षा को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया है। प्रशासन द्वारा पट्टा महलोग से गोयला सड़क का चौड़ीकरण कर इसे पूरी तरह पक्का तो कर दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद यात्रियों के सफर में मौत का डर बना हुआ है। कंजैरा (खनेट) के पास लोक निर्माण विभाग (PWD) और जल शक्ति विभाग की एक अत्यंत गंभीर चूक देखने को मिल रही है।

इस व्यस्त मार्ग पर सड़क के ठीक बीचों-बीच एक हैंडपंप जस का तस खड़ा है। तेज रफ्तार से आने वाले दोपहिया और चार पहिया वाहनों के लिए यह हैंडपंप हर समय एक बड़े हादसे का सबब बना हुआ है। सबसे अधिक हैरानी की बात यह है कि सड़क के बिल्कुल मध्य में हैंडपंप आने के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने इसकी सुरक्षा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है।
न तो इस हैंडपंप के चारों ओर कोई सुरक्षा घेरा या बैरिकेड बनाया गया है और न ही रात के समय वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए कोई रिफ्लेक्टर लगाया गया है। इसके साथ ही, इसे मुख्य मार्ग से हटाकर सड़क के किनारे शिफ्ट करने की कोई जहमत नहीं उठाई गई। रात के अंधेरे में या भारी कोहरे के समय इस स्थान पर किसी भी वक्त कोई भी वाहन सीधे इस हैंडपंप से टकरा सकता है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर मौके पर पहुंचे ‘आपकी आवाज पट्टा महलोग’ के संचालक राजकुमार शर्मा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इस समस्या को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि इस तकनीकी समस्या का समाधान बेहद आसान था। इस हैंडपंप के भीतर एक मोटर लगाकर इसके पानी को पाइप के जरिए सड़क के किनारे आसानी से शिफ्ट किया जा सकता था। राजकुमार ने आरोप लगाया कि दोनों संबंधित विभागों को जनता की जान की कोई परवाह नहीं है और शायद अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।
अब पट्टा महलोग की स्थानीय जनता और सामाजिक संगठन प्रशासन से सीधे जवाब मांग रहे हैं कि अगर भविष्य में यहाँ कोई अप्रिय घटना या जानमाल का नुकसान होता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी तय की जाएगी? क्या इसकी पूरी जिम्मेदारी जल शक्ति विभाग की होगी या फिर लोक निर्माण विभाग इसके लिए कसूरवार होगा? स्थानीय लोगों की मांग है कि दोनों ही विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के बजाय आपसी समन्वय स्थापित करें और किसी बेगुनाह की जान जाने से पहले इस गंभीर समस्या का तुरंत स्थाई समाधान निकालें।


















