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Ayodhya Ram Mandir: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, ‘राजनीति न करें, यह सिर्फ अपराध का मामला’

Ayodhya Ram Mandir Donation Case: अयोध्या राम मंदिर के चंदे में गबन की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतें राजनीति की जगह नहीं हैं, वहीं उत्तर प्रदेश सरकार को SIT गठन पर निर्देश लेकर आने को कहा है।
Published on: 21 July 2026
Ayodhya Ram Mandir Case: अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद, 13 जुलाई को होगी सुनवाई

Ayodhya Ram Mandir Donation Dispute Supreme Court Hearing: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए मिले दान में कथित गबन और गड़बड़ी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि इस पूरे मामले को केवल एक अपराध के तौर पर देखा जाना चाहिए और इसकी सही तरीके से जांच होनी चाहिए।

अदालत ने इस बात पर विशेष बल दिया कि इस संवेदनशील मुद्दे का किसी भी प्रकार से राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। बता दें कि चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए चंदे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की सीबीआई (CBI) जांच की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिशों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका के सामने इस समय केवल एक ही मुख्य सवाल है कि यदि कोई गंभीर अपराध हुआ है, तो उसकी पूरी तरह निष्पक्ष और सही तरीके से जांच कैसे सुनिश्चित की जाए।

SIT गठन पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
अदालत ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि वर्तमान में इस गबन मामले की जांच किसके द्वारा की जा रही है। इस सवाल के जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि शुरुआत में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई थी। SIT की प्रारंभिक समीक्षा में यह पाया गया कि यह मामला एक गंभीर अपराध का बनता है, जिसके बाद इसे आगे की जांच के लिए पुलिस को सौंप दिया गया।

इस जानकारी के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या जांच की पूरी जिम्मेदारी खुद SIT को ही नहीं सौंपी जा सकती, क्योंकि उसमें वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत तीन-चार दिनों के बाद इस मामले पर पुनः सुनवाई करेगी और जांच के इस पहलू पर विस्तार से विचार करेगी। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से निर्देश लेकर आने को कहा कि क्या इस जांच के लिए पुनः एक समर्पित SIT बनाई जा सकती है, जिस पर सॉलिसिटर जनरल ने सहमति जताई।

याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांगें
उल्खलेनीय है कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि उनकी मुख्य मांग केवल वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही की है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के समय आम जनता से दान स्वीकार किया गया था, इसलिए अब दान से जुड़ी सभी रसीदों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए और उन्हें सार्वजनिक रूप से अपलोड किया जाना चाहिए।

इस सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि “अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं। यह सिर्फ एक अपराध होने का मामला है। हमारा काम सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि जांच सही तरीके से हो।”
— जस्टिस सूर्यकांत, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया

इसके अतिरिक्त अन्य वकीलों ने एफआईआर को सार्वजनिक करने, डिजिटल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने और पूरी जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की। याचिकाओं में सीबीआई जांच के साथ-साथ अदालत की निगरानी में जांच कराने, दान के रजिस्टर्स, बहीखाते, बैंक रिकॉर्ड, यूपीआई लॉग्स, सीसीटीवी फुटेज, ई-मेल्स और सर्वर्स समेत सभी वित्तीय रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने की गुहार लगाई गई है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को आश्वासन दिया कि मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई के लिए तय की है।

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