Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

Himachal Scholarship Scam: हिमालयन ग्रुप चेयरमैन की अग्रिम जमानत रद्द, गिरफ्तारी तय

Supreme Court ED Appeal: सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले को पलटते हुए ईडी की अपील स्वीकार की; करीब 250 करोड़ रुपये के कथित छात्रवृत्ति घोटाले में हिरासत में पूछताछ को बताया आवश्यक।
Published on: 22 July 2026
Himachal Scholarship Scam

Himachal Scholarship Scam: हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 250 करोड़ रुपये के कथित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति घोटाले में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। मामले में आरोपित हिमालयन ग्रुप ऑफ प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन रजनीश बंसल की गिरफ्तारी अब लगभग तय मानी जा रही है। देश की सर्वोच्च अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा रजनीश बंसल को दी गई अग्रिम जमानत को रद्द करते हुए प्रवर्तन निदेशालय की याचिका स्वीकार कर ली है।

अदालत के इस रुख से मामले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसियों को बड़ी राहत मिली है। बता दें कि जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए माना कि अपराध की गंभीर प्रकृति और धन के प्रवाह (मनी ट्रेल) की गहराई से जांच के लिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है।

सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की कि ऐसे गंभीर आर्थिक अपराधों के मामलों में जांच एजेंसियों को प्रभावी और स्वतंत्र जांच का पूरा अवसर मिलना चाहिए। इसके साथ ही पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल जांच की आवश्यकता के आधार पर दिया गया है और इसे मामले के मुख्य आरोपों के गुण-दोष पर अंतिम राय नहीं माना जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी ने अपना पक्ष मजबूती से रखा। जांच एजेंसी ने अदालत को सूचित किया कि यह पूरा मामला अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए निर्धारित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति राशि के कथित दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है। ईडी की ओर से दलील दी गई कि अग्रिम जमानत की वजह से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। आरोपित को हिरासत में लिए बिना पैसों के लेनदेन और कथित मनी लांड्रिंग की पूरी शृंखला का पर्दाफाश करना संभव नहीं है।

उल्लेखनीय है कि पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से चलाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण योजना है। इसके तहत वंचित और पिछड़े वर्गों के पात्र छात्रों की उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। वर्ष 2018 में प्रदेश के शिक्षा विभाग की प्राथमिक जांच के दौरान छात्रवृत्ति वितरण में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के संकेत मिले थे।

जांच में यह बात सामने आई थी कि वर्ष 2012-13 से 2017-18 की अवधि के दौरान राज्य के कई निजी शिक्षण संस्थानों ने कथित तौर पर जाली दस्तावेजों, फर्जी प्रवेशों और अन्य अवैध तरीकों का सहारा लेकर भारी-भरकम छात्रवृत्ति की राशि हासिल कर ली। इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को लगभग 250 करोड़ रुपये के भारी नुकसान का आकलन किया गया है। प्रारंभिक जांच के दौरान प्रदेश के 22 से अधिक निजी शिक्षण संस्थानों की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्ष 2019 में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने इस पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने के आदेश जारी किए थे। सीबीआई ने जांच पूरी करने के पश्चात कई निजी शिक्षण संस्थानों के संचालकों, बिचौलियों और संबंधित सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिक दर्ज की।

सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में सामने आए तथ्यों और वित्तीय अनियमितताओं के आधार पर ही ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मनी लांड्रिंग का अलग मामला दर्ज कर जांच शुरू की, जिसमें अब सुप्रीम कोर्ट ने रजनीश बंसल की अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया है।

Enforcement DirectorateHimachal Scholarship ScamHimalayan GroupRajneesh BansalSupreme Court

Join WhatsApp

Join Now