HPBOSE Paper Leak Controversy: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य में किसी भी बोर्ड परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। डॉ. शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से अपील की है कि वे बिना तथ्यों के भ्रामक बयानबाजी करने से बचें और शिक्षा जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति न करें।
धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के कथित बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हिमाचल बोर्ड के पेपर लीक होने का दावा पूरी तरह तथ्यहीन और निराधार है। डॉ. शर्मा ने कहा कि इस समय देशभर में नीट (NEET) परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन इस राष्ट्रीय स्तर के विवाद के साथ हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड का नाम जोड़ना पूरी तरह गलत और अनुचित है।

नीट परीक्षा पेपर लीक मामले और दोबारा परीक्षा कराने की मांग को लेकर देश भर में जारी बवाल के बीच जेपी नड्डा ने हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड का संदर्भ देते हुए पेपर लीक की बात कही थी। इसी के परिपेक्ष्य में स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. राजेश शर्मा ने नड्डा के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे हिमाचल शिक्षा बोर्ड की छवि खराब करने की कोशिश बताया।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड एक स्वायत्त और प्रतिष्ठित संस्था है, जिसे राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर रखा जाना चाहिए। नड्डा ने बोर्ड के संबंध में गलत तथ्य प्रस्तुत कर प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है।
नीट मामले पर अपनी बात रखते हुए डॉ. शर्मा ने केंद्र सरकार से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने इस कथित धांधली की जिम्मेदारी तय करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग भी दोहराई है।
पत्रकार वार्ता के दौरान राज्य ओपन स्कूल से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्र मामले पर भी बोर्ड अध्यक्ष ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जिस संस्थान का इस मामले में जिक्र किया जा रहा है, उसे केवल वर्ष 2017 से 2019 के दौरान ही बोर्ड से मान्यता मिली थी। वर्तमान समय में उस संस्थान का हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के किसी भी प्रशासनिक या शैक्षणिक कार्य से कोई लेना-देना नहीं है।
इतिहास का हवाला देते हुए डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि जेपी नड्डा के पिता स्वर्गीय एन. एल. नड्डा वर्ष 1992 से 1995 तक हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष रहे थे। वर्ष 1993 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बावजूद उन्हें पद से नहीं हटाया गया था। कांग्रेस पार्टी ने हमेशा शिक्षा को राजनीति से दूर रखा और उनके उत्कृष्ट कार्यों का पूरा सम्मान किया।
डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि नड्डा उनके बड़े भाई के समान हैं, लेकिन इसके बावजूद वे हिमाचल का नाम बदनाम कर रहे हैं और शिक्षा बोर्ड के बारे में भ्रांतियां फैला रहे हैं। डॉ. शर्मा ने नड्डा को याद दिलाया कि हिमाचल में भाजपा के कार्यकाल के दौरान पेपर लीक हुए थे, जबकि कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार और पेपर लीक के मामलों के कारण 21 फरवरी 2023 को हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग (HPSSC) हमीरपुर को भंग कर दिया था और इसके स्थान पर राज्य चयन आयोग का गठन किया था।


















