CM Sukhvinder Singh Sukhu in Himachal Primary Teacher Protest: हिमाचल प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के पुनर्गठन और नई व्यवस्थाओं को लागू करने के विरोध में प्रदेशभर के प्राथमिक शिक्षक एकजुट हो गए हैं। प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले राज्य भर से आए हजारों शिक्षकों ने राजधानी शिमला के ऐतिहासिक चौड़ा मैदान में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम के विरोध में आयोजित इस महाधरने में शिक्षकों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी है कि जब तक इस व्यवस्था की अधिसूचना को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा। मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू के साथ हुई प्राथमिक दौर की बातचीत में कोई ठोस समाधान न निकलने के बाद शिक्षक संघ ने महाधरने के तुरंत बाद अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन शुरू करने की घोषणा कर दी है।

रविवार को स्थिति को भांपते हुए स्वयं मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू शिमला के चौड़ा मैदान स्थित धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने वहां शिक्षकों की रैली को संबोधित किया और प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के संबंध में कई बातों पर प्रकाश डाला। हालांकि, मुख्यमंत्री की उपस्थिति और वक्तव्य के बावजूद बात नहीं बन सकी और प्राथमिक शिक्षक संघ अपनी मांगों पर अड़ा रहा। आंदोलनकारी शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि वे अपनी मांगों को लेकर किसी भी स्तर पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं।
उधर, चौड़ा मैदान में शिक्षकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार प्राथमिक शिक्षा प्रणाली में सुधार और शिक्षकों के स्वाभिमान को प्राथमिकता देती है। उन्होंने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि न्यू कॉम्प्लेक्स प्रणाली में जल्द ही व्यापक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि यदि अध्यापकों और शिक्षा व्यवस्था के समग्र हित में आवश्यक पाया गया, तो इस प्रणाली को पूरी तरह रद्द करने से भी सरकार पीछे नहीं हटेगी।
शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मांगों का सर्वमान्य समाधान निकालने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने एक विशेष उच्चस्तरीय कमेटी के गठन का निर्णय लिया है। उन्होंने शिक्षकों को आश्वस्त किया कि आगामी 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस से पूर्व इस गठित कमेटी के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें शिक्षकों की सभी जायज मांगों पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इसके अलावा विरोध प्रदर्शनों के दौरान शिक्षकों पर हुई दंडात्मक कार्रवाइयों को लेकर भी सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बड़ा दिल दिखाते हुए घोषणा की कि आंदोलन के दौरान प्राथमिक शिक्षकों के विरुद्ध की गई निलंबन की सभी कार्रवाइयों, विभागीय जांचों और पुलिस में दर्ज एफआईआर को राज्य सरकार पूरी तरह से वापस लेगी। इस कदम का उद्देश्य शिक्षकों और सरकार के बीच बने अविश्वास को कम करना है।
दूसरी ओर, प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश शर्मा ने आंदोलन के संदर्भ में जानकारी देते हुए बताया कि शिक्षक 15 दिनों की लंबी पैदल यात्रा पूरी करने के बाद इतनी बड़ी संख्या में शिमला पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि शिमला के चौड़ा मैदान में शिक्षकों की यह विशाल उपस्थिति इस बात का सीधा प्रमाण है कि प्रदेश का कोई भी प्राथमिक शिक्षक सरकार की इस नई व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है। रमेश शर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार और शिक्षा विभाग नियमित भर्तियों से बचने के लिए इस नई व्यवस्था को लागू करने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे पहले से कार्यरत शिक्षकों पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ जाएगा।
शिक्षक संघ ने प्रदेश में रिक्त पड़े पदों का आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। रमेश शर्मा के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में जेबीटी शिक्षकों के 5000 से अधिक पद वर्तमान में खाली पड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त, नर्सरी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की जा रही है, जिसके कारण प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 50 प्रतिशत स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। ऐसे माहौल में न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम लागू करने से प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी।
वार्ता के संदर्भ में रमेश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में सरकार ने समिति बनाकर सुझाव लेने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन अब शिक्षक संघ को केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी शिक्षा मंत्री द्वारा मांगें पूरी करने का वादा किया गया था, परंतु उनमें से एक भी मांग पूरी नहीं की गई और शिक्षकों के हितों को नुकसान पहुंचाया गया।
प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन इस लड़ाई को अंतिम मुकाम तक लड़ेगा। महाधरने के बाद शुरू हुआ अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक कि न्यू कॉम्प्लेक्स सिस्टम की अधिसूचना वापस नहीं ली जाती और लंबित मांगों पर लिखित एवं ठोस निर्णय नहीं लिया जाता। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यकता पड़ी, तो यह आंदोलन वर्ष 2027 के हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव तक भी निरंतर जारी रखा जाएगा।


















