Supreme Court on Student Protest: सुप्रीम कोर्ट ने हाल के छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस द्वारा किए गए कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर बेहद कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल किसी स्थान पर आंदोलन या प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज या अत्यधिक बल प्रयोग को जायज नहीं ठहराया जा सकता। बता दें कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसकी उच्च स्तरीय जांच की मांग को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है।
उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र मिश्रा द्वारा यह जनहित याचिका दायर की गई है। इससे पूर्व, तीन दिन पहले इसी मुद्दे पर देश के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र भी भेजा गया था, जिस पर मुख्य न्यायाधीश द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया गया था। इसके बाद अब इस मामले को औपचारिक रूप से जनहित याचिका के माध्यम से अदालत के समक्ष लाया गया है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार को संवैधानिक गारंटी करार दिया। अदालत ने कहा कि संविधान में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार पूरी तरह से सुरक्षित है और इसे किसी भी स्थिति में नकारा नहीं जा सकता। पीठ ने आगे कहा कि देश में शांतिपूर्ण आंदोलनों को संचालित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का प्रोटोकॉल होना चाहिए, ताकि लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए उचित स्थान मिल सके और अधिकारियों को असामाजिक तत्वों से निपटने में आसानी हो।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कर्मियों पर होने वाले हमलों और हिंसा पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। जब सुनवाई के दौरान एक वकील ने उग्र भीड़ द्वारा पुलिस कर्मियों के घायल होने और उनके परिवारों पर हुए हमलों का संदर्भ दिया, तो न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि पुलिस कर्मियों को चोट पहुंचना भी समान रूप से चिंता का विषय है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार से यह जवाब मांगा जा सकता है कि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए थे।
Police excesses during students’ protest | Supreme Court has said that the right to peaceful protest is a constitutional guarantee, that the mere existence of an agitation cannot justify alleged police excesses against demonstrators. A bench led by CJI Surya Kant also indicated… pic.twitter.com/PopB5NaPAk
— ANI (@ANI) July 27, 2026
CJI सूर्यकांत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पूरे देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान दिशानिर्देश और प्रोटोकॉल लागू होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब कोई शांतिपूर्वक आंदोलन करना चाहता है, तो उसके लिए एक निश्चित और उचित स्थान होना चाहिए। इसमें कोई बाधा नहीं है, लेकिन यदि कोई असामाजिक तत्व इसमें शामिल होता है, तो उससे सख्ती से निपटा जा सकता है। अदालत ने माना कि यह मुद्दा पूरे देश से जुड़ा हुआ है और इस प्रक्रिया में आत्म-अनुशासन भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए मंगलवार को सूचीबद्ध किया गया है।
गौरतलब है कि याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वह संबंधित अधिकारियों को रिट ऑफ मैंडेमस (Writ of Mandamus) जारी करे। इसके तहत घटना से जुड़े सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित और संरक्षित करने के निर्देश दिए जाएं। इन साक्ष्यों में सीसीटीवी फुटेज, पुलिसकर्मियों के बॉडी-वॉर्न कैमरा फुटेज, ड्रोन फुटेज, मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया वीडियो और पोस्ट, पुलिस वायरलेस एवं संचार रिकॉर्ड, कॉल लॉग, कंट्रोल रूम रिकॉर्ड, पुलिस तैनाती संबंधी आदेश तथा जीपीएस रिकॉर्ड शामिल हैं।
याचिका में यह आशंका भी जताई गई है कि इन महत्वपूर्ण सबूतों को नष्ट किया जा सकता है, बदला जा सकता है या दबाया जा सकता है। इसलिए इन्हें सुरक्षित रखकर उचित न्यायिक और जांच प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों, मीडिया रिपोर्टों या आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर किसी भी लोक सेवक, पुलिस अधिकारी या सुरक्षा कर्मी द्वारा कोई संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) किया जाना प्रतीत होता है, तो उसके खिलाफ तुरंत प्राथमिकता के आधार पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए और निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं समयबद्ध आपराधिक जांच शुरू की जाए।


















