Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए ‘ऑर्फन एंड विडो सेस’ (Orphan and Widow Cess) को लेकर राज्य की राजनीति में बयानबाजी तेज्ज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है।
उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति खराब होना समझ में आता है, लेकिन अनाथों और विधवाओं के नाम पर जनता से पैसे जुटाकर सरकार चलाने का इंतजाम करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा कदम आज से पहले प्रदेश की किसी भी सरकार ने नहीं उठाया था। जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुक्खू द्वारा अन्य राज्यों से तुलना किए जाने को पूरी तरह से अतार्किक करार दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दूसरे राज्यों की आर्थिक स्थिति और वहां के लोगों की क्रय क्षमता (Paying Capacity) हिमाचल से बेहतर हो सकती है। ऐसे में अन्य प्रदेशों के मापदंड हिमाचल के संदर्भ में लागू नहीं किए जा सकते। जब यह विधेयक विधानसभा में पेश किया गया था, तब भी भारतीय जनता पार्टी ने अनाथ और विधवा के नाम पर प्रावधान जोड़ने का पुरजोर विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह पैसा वाकई अनाथों और विधवाओं के कल्याण पर खर्च होगा या फिर इसका इस्तेमाल केवल सरकार की दैनिक गतिविधियों को चलाने के लिए किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार बार-बार ईंधन की कीमतें बढ़ाने पर जोर दे रही है। सरकार को यह समझना चाहिए कि डीजल के दाम लगातार तीन बार बढ़ाए जाने से सीधा बोझ राज्य की गरीब जनता पर पड़ता है। हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क परिवहन ही आवाजाही और माल ढुलाई का एकमात्र जरिया है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से दैनिक उपयोग की सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं, जिसका शायद मुख्यमंत्री को अंदाजा नहीं है। इस मुद्दे को आगामी विधानसभा सत्र में प्रमुखता से उठाया जाएगा।
प्रदेश में जारी कर्मचारी असंतोष पर बोलते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि आज मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर किसी को भरोसा नहीं रह गया है। बजट की घोषणाएं अधूरी हैं, चुनाव से पहले दी गई गारंटियां पूरी नहीं की गईं और जनसभाओं में किए गए वादे भी हवा हवाई साबित हुए। उन्होंने सवाल किया कि यदि भाजपा कर्मचारी हितैषी नहीं है, तो आज पूरे प्रदेश में कर्मचारी सड़कों पर और धरने पर क्यों बैठे हैं?
एचआरटीसी (HRTC) के कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। धर्मशाला में हजारों की संख्या में पूर्व कर्मचारियों ने विधानसभा का घेराव किया, ऐसी स्थिति प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई।
उन्होंने आगे कहा कि शिमला शहर के रिज मैदान और राज्य सचिवालय से लेकर पूरे प्रदेश में कर्मचारी आंदोलनरत हैं। पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में बुरी तरह से मिली हार के बाद सरकार पर भारी दबाव है। कांग्रेस आलाकमान से पड़ी फटकार के कारण ही आनन-फानन में नई घोषणाएं की जा रही हैं, जिन पर जनता का विश्वास खत्म हो चुका है।
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम को लेकर हाई कोर्ट द्वारा सरकार पर लगाए गए 5 लाख रुपये के जुर्माने पर भी जयराम ठाकुर ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं को कानून का विद्यार्थी बताते हैं, लेकिन खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं। जब एक सरकारी स्कूल में राज्य स्तरीय कार्यक्रम के लिए शामियाना लग चुका था, तब सरकार अनुमति लेने हाई कोर्ट पहुंची।
हाई कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब सारा कार्यक्रम पहले से तय कर दिया गया था, तो बाद में अनुमति मांगने का क्या औचित्य है। अदालत ने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति तो दी, लेकिन सरकार पर 5 लाख का भारी जुर्माना लगा दिया। जयराम ठाकुर ने इसे सरकार की बड़ी फजीहत करार दिया और कहा कि इस फैसले पर मुख्यमंत्री द्वारा खुद टिप्पणी करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।


















