EV CNG Commercial Vehicle Age Limit: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने देश में कमर्शियल वाहन मालिकों, ट्रांसपोर्टरों और ऑटो सेक्टर से जुड़े हितधारकों के लिए एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। सरकार ने मोटर व्हीकल रूल्स (Central Motor Vehicles Rules, 1989) में व्यापक संशोधनों का एक नया ड्राफ़्ट जारी किया है।
इस प्रस्तावित मसौदे के तहत बैटरी से चलने वाले वाहनों (EV), हाइड्रोजन फ़्यूल तकनीक वाले वाहनों और कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) से चलने वाले कमर्शियल वाहनों की सड़क पर व्यावसायिक इस्तेमाल की समय सीमा को 5 साल तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

मौजूदा व्यवस्था में व्यावसायिक श्रेणी में चलने वाले अधिकांश वाहनों के इस्तेमाल की अधिकतम सीमा 15 साल तय रहती है और गाड़ी की ख़रीद या रजिस्ट्रेशन के समय ही 15 साल का रोड टैक्स जमा कर लिया जाता है। यदि यह नया नियम अंतिम रूप से लागू हो जाता है, तो हरित ईंधन आधारित कमर्शियल गाड़ियाँ पहले की तुलना में अधिक अवधि तक सड़क पर वैध रूप से चलाई जा सकेंगी। इससे ट्रांसपोर्टरों को अपनी गाड़ियों की लागत वसूलने और परिचालन लाभ कमाने के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंत्रालय की ओर से यह प्रस्तावित बदलाव 10 अगस्त को आधिकारिक ड्राफ्ट के रूप में सामने आए हैं। सरकार ने इस पर आम जनता, ट्रांसपोर्ट यूनियनों और ऑटो इंडस्ट्री से 30 दिनों के भीतर आपत्तियाँ और सुझाव आमंत्रित किए हैं। हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रियाओं की समीक्षा करने के बाद इन नियमों को ‘ऑफिशियल गजट’ में अंतिम रूप से प्रकाशित किया जाएगा, जिसके बाद ही ये देशभर में प्रभावी होंगे। हालांकि जारी किए गए शुरुआती नोटिफिकेशन में हर अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग से अधिकतम उम्र सीमा का अलग-अलग ब्योरा स्पष्ट नहीं किया गया है।
इस ड्राफ्ट में केवल वाहनों की उम्र बढ़ाने तक ही राहत सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि कमर्शियल ट्रांसपोर्ट प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए नेशनल परमिट सिस्टम के डिजिटलीकरण का भी बड़ा निर्णय लिया गया है। अब नेशनल परमिट पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जारी किया जाएगा।
वाहन मालिकों को अब हर साल परमिट रिन्यू कराने की बाध्यता से मुक्ति देते हुए 1 साल से लेकर 5 साल तक की अवधि चुनने का लचीला विकल्प दिया जा रहा है। सरकार ने इस नेशनल परमिट की सालाना फीस 16,500 रुपये प्रस्तावित की है।
बिना बॉडी वाले चेसिस के निर्माण और पंजीकरण से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए भी नया नियम बनाया गया है। अक्सर देखा जाता है कि कंपनी से केवल चेसिस ख़रीदने के बाद उस पर बॉडी बनवाने में कई महीनों का समय लग जाता है। इसे देखते हुए मंत्रालय ने ऐसे चेसिस के लिए 6 महीने तक के अस्थायी पंजीकरण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। इस राहत से वाहन निर्माताओं और बॉडी मेकर्स दोनों को काम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
इसके अतिरिक्त, पूरी तरह तैयार वाहनों को किसी अन्य राज्य में पंजीकृत कराने अथवा किसी वाहन को एडॉप्टेड व्हीकल में परिवर्तित करने की स्थिति में अस्थायी रजिस्ट्रेशन की समय सीमा को 45 दिन करने का सुझाव दिया गया है। वहीं कागजी कार्रवाई खत्म करने के लिए डिजिटल ‘VAHAN’ डेटाबेस के एकीकरण पर ज़ोर दिया गया है। पोर्टल पर गाड़ी का नंबर दर्ज करते ही GST, PAN, उद्यम आधार और कॉर्पोरेट आइडेंटिफिकेशन नंबर (CIN) जैसी सभी आवश्यक जानकारियाँ स्वतः प्रदर्शित हो जाएँगी।


















