Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

Kasauli Gang Rape Case: कसौली गैंगरेप केस में बड़ौली और रॉकी मित्तल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, कोर्ट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट सही ठहराई

Kasauli Rape Case Hearing: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से बहुचर्चित कसौली रेप केस में मोहनलाल बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल को बड़ी राहत मिली है। सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए पीड़िता की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है।
Kasauli Gang Rape Case: कसौली गैंगरेप केस में बड़ौली और रॉकी मित्तल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, कोर्ट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट सही ठहराई

Kasauli Gang Rape Case: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से बहुचर्चित कसौली रेप केस में हरियाणा बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष मोहनलाल बड़ौली और सिंगर रॉकी मित्तल को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने पुलिस द्वारा इस मामले में दाखिल की गई कैंसिलेशन (क्लोजर) रिपोर्ट को पूरी तरह से सही ठहराया है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि केवल एकतरफा बयानों के आधार पर किसी भी निर्दोष व्यक्ति को समन जारी नहीं किया जा सकता है।

यह फैसला न्यायमूर्ति राकेश कैंथला की पीठ ने पीड़िता द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए सुनाया। कोर्ट ने कहा कि केवल शिकायतकर्ता के हलफनामे या बयानों के आधार पर आरोपियों को अदालत में घसीटना न्यायसंगत नहीं है, खासकर तब जब मुख्य चश्मदीद गवाह खुद दावों का पूरी तरह खंडन कर रहा हो।

उल्लेखनीय है कि, हिमाचल प्रदेश के कसौली पुलिस थाने में पीड़िता ने 13 दिसंबर 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 3 जुलाई 2023 को कसौली के एक नामी होटल में मोहनलाल बड़ौली और रॉकी मित्तल ने उसे और उसकी सहेली को नशीला पदार्थ पिलाकर उनके साथ दुष्कर्म किया और वीडियो बना लिया। हालांकि, पुलिस जांच में घटना का कोई भी साक्ष्य नहीं मिला था, जिसके बाद कसौली की अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने 8 जनवरी 2026 को पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था।

इसे भी पढ़ें:  अब हिमाचल कांग्रेस मुख्यालय में लगा पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की फोटो वाला होर्डिंग लगा

इस कानूनी विवाद की प्रक्रिया में सोलन जिला एवं सत्र न्यायालय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। जब कसौली की निचली अदालत ने पहली बार सबूतों की कमी के चलते क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार किया था, तब पीड़िता ने इस फैसले को सोलन के जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर कर चुनौती दी थी।

जुलाई 2025 में सोलन कोर्ट ने पीड़िता की याचिका को मंजूर कर लिया था। सोलन कोर्ट ने पाया था कि निचली अदालत ने पीड़िता की मौजूदगी सुनिश्चित किए बिना और उसकी आपत्तियां सुने बिना ही क्लोजर रिपोर्ट मंजूर कर ली थी। इसके बाद सोलन कोर्ट ने मामले को वापस कसौली कोर्ट भेजकर पुलिस रिपोर्ट पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया था।

इसे भी पढ़ें:  रोहड़ू: महिला की हत्या, वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार

सोलन कोर्ट के आदेश के बाद मामला पुनः कसौली कोर्ट पहुंचा, जहां पीड़िता को अपने बयान और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया गया। हालांकि, पीड़िता कोर्ट में हाजिर नहीं हुई, जिसके बाद जनवरी 2026 में कसौली कोर्ट ने दोबारा पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।

Kasauli Gang Rape Case: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और गायक रॉकी मित्तल को बड़ी राहत, कोर्ट ने बंद किया मामला
Kasauli Gang Rape Case: भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और गायक रॉकी मित्तल को बड़ी राहत, कोर्ट ने बंद किया मामला

इस फैसले के खिलाफ पीड़िता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पीड़िता का दावा था कि यह घटना उसकी सहेली की मौजूदगी में हुई थी। लेकिन जब मजिस्ट्रेट के सामने सहेली के बयान दर्ज किए गए, तो उसने स्पष्ट कहा कि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं थी। सहेली ने खुलासा किया कि पीड़िता और उसके नियोक्ता ने उसे झूठी गवाही देने के लिए पैसों का लालच दिया था।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मामले की कई गंभीर कमियों को रेखांकित किया। अदालत ने पाया कि कथित घटना जुलाई 2023 की बताई गई थी, जबकि एफआईआर दिसंबर 2024 में दर्ज कराई गई। इस 18 महीने की लंबी देरी का कोई भी तार्किक कारण याचिकाकर्ता की ओर से नहीं दिया गया। इसके अलावा, पीड़िता ने मेडिकल ऑफिसर के समक्ष अपनी मेडिकल जांच कराने से साफ इनकार कर दिया था, जिससे दुष्कर्म की पुष्टि के लिए कोई भी वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं था।

इसे भी पढ़ें:  फासले पैरों से नहीं, हौसलों से नापते हैं पीयूष, राष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस में जीता कांस्य पदक

जांच के दौरान होटल के कर्मचारियों और उस दिन वहां ठहरे अन्य मेहमानों से भी पूछताछ की गई थी। होटल के किसी भी कर्मचारी या मेहमान ने वहां किसी भी तरह की चीख-पुकार या असामान्य गतिविधि होने की बात से पूरी तरह इनकार किया।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि हालांकि यौन उत्पीड़न के मामलों में पीड़िता के बयानों को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन जब पूरी कहानी तर्कहीन नजर आए, मुख्य चश्मदीद गवाह मुकर चुका हो और एफआईआर प्रतिशोध की भावना से प्रेरित लगे, तो बिना किसी विश्वसनीय साक्ष्य के आरोपियों को समन जारी करना कानूनन गलत होगा। जिसके बाद हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कसौली सामूहिक दुष्कर्म मामले में पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए पीड़िता की पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया।

Himachal Pradesh High CourtKasauli Rape CaseMohan Lal BadoliRocky MittalSolan Court

Join WhatsApp

Join Now