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Success Story: टीजीटी साइंस से डेयरी उद्यमी तक का सफर, सोनिका का ‘स्मार्ट वर्क’ बना प्रेरणा स्रोत

Published on: 2 November 2025
Success Story: टीजीटी साइंस से डेयरी उद्यमी तक का सफर, सोनिका का ‘स्मार्ट वर्क’ बना प्रेरणा स्रोत

Success Story: जिला बिलासपुर के घुमारवीं क्षेत्र की ग्राम पंचायत घुमारवीं के गांव चुवाड़ी की सोनिका ने डेयरी फार्मिंग के क्षेत्र में प्रगति और आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। निजी मिनर्वा सीनियर सेकेंडरी स्कूल घुमारवीं में टीजीटी साइंस के रूप में कार्यरत सोनिका न केवल शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं, बल्कि पशुपालन के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन की एक नई कहानी भी लिख रही हैं।

सोनिका ने वर्ष 2019 में डेयरी फार्मिंग की शुरुआत एक जर्सी गाय से करते हुए आज उनके पास कुल छह गायें और एक हीफर है। सोनिका डेयरी फार्म को पूरी तरह वैज्ञानिक पद्धति से संचालित कर रही हैं और दुधारू गायों का दुहन आधुनिक मिल्किंग मशीन से करती हैं। हरे चारे की कटाई के लिए चाफ कटर मशीन का उपयोग कर रही हैं। जरूरत पड़ने पर वह समय-समय पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों एवं चिकित्सकों का मार्गदर्शन भी प्राप्त करती हैं।

सोनिका ने बताया कि वह प्रतिदिन सुबह 5ः30 बजे से गाय से जुड़े कार्यों को प्रारंभ करती हैं और सुबह 7 बजे तक पूर्ण कर लेती हैं। इस दौरान पति भी उनका सहयोग करते हैं, जबकि दिन के समय परिवार के अन्य सदस्यों का पूरा सहयोग मिलता है। इसी तरह प्रतिदिन शाम को 5 बजे से गाय से जुड़े कार्यों को शुरू करते हुए इन्हें 6ः30 बजे तक पूरा कर लिया जाता है।

सोनिका कहती हैं कि उनका डेयरी फार्म प्रतिदिन लगभग 57 लीटर दूध का उत्पादन कर रहा है, जिसे 65 रुपये प्रति लीटर की दर से बेचने पर प्रतिमाह लगभग एक लाख 10 हजार रुपए की आय होती है। सभी खर्चों को निकालकर प्रतिमाह लगभग 74 हजार रुपए का शुद्ध लाभ हो रहा है। सोनिका का कहना है कि महिलाएं और युवा 1 या 2 गायों से भी डेयरी फार्मिंग की शुरुआत करते हैं तो भी वह आर्थिक रूप से सशक्त बन सकते हैं। यह कार्य सुबह और शाम सिर्फ एक-एक घंटे का है, जिसे नौकरी पेशा महिलाएं भी आसानी से कर सकती हैं।

उनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने गाय व भैंस का न्यूनतम समर्थन मूल्य क्रमशः 51 और 61 रुपए निर्धारित किया है, जिससे न केवल उनका दूध उच्च दामों पर बाजार में आसानी से बिक रहा है, बल्कि अन्य पशुपालकों की आय में भी आशातीत वृद्धि हो रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी
सहायक निदेशक पशुपालन विभाग डाॅ. किशोरी लाल शर्मा का कहना है कि प्रदेश सरकार डेयरी फार्मिंग के माध्यम से पशु पालकों को बढ़ावा दे रही है। पंजीकृत दुग्ध उत्पादक समितियों को दूध बेचने पर किसानों को सरकार प्रति लीटर की दर से से 3 रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है।

इसके अतिरिक्त दो किलोमीटर से अधिक दूरी तक दूध खरीद केंद्र तक स्वयं दूध ले जाने वाले पशुपालकों और समितियों को 2 रुपए प्रति लीटर उपदान देने का भी प्रावधान किया है। जिला बिलासपुर में 15 नई दुग्ध उत्पादक समितियों का गठन किया गया है और जिला में 40 अन्य दुग्ध उत्पादक समितियां पहले से ही कार्यरत हैं।

उन्होंने बताया कि जो किसान डेयरी फाॅर्मिंग से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें प्रदेश सरकार उद्योग विभाग के माध्यम से उपदान की सुविधा प्रदान कर रही है। कांगड़ा जिला में स्थापित हो रहे ढगवार दूध प्रसंस्करण संयंत्र का लाभ जिला बिलासपुर के दूध उत्पादक किसानों को भी प्राप्त होगा।

डीसी बिलासपुर राहुल कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार किसानों व बागवानों के उत्थान व कल्याण को अनेकों कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए दुग्ध उत्पादन समितियों का गठन कर किसानों एवं पशुपालकों को आर्थिक मदद भी प्रदान कर रही है। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा किसानों से डेयरी फाॅर्मिंग गतिविधियों से जुड़कर आर्थिकी को सुदृढ़ करने और सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया है।

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