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Baaghi 4 Tiger Shroff Full Movie: बागी 4 में टाइगर श्रॉफ की एक्शन बाजीगरी फीकी, संजय दत्त बने एकमात्र तारणहार

Baaghi 4 Tiger Shroff Full Movie: बागी 4 में टाइगर श्रॉफ की एक्शन बाजीगरी फीकी, संजय दत्त बने एकमात्र तारणहार
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Baaghi 4 Tiger Shroff Full Movie Review: 7 सितंबर 2025 को रिलीज हुई ‘बागी 4’ एक्शन फ्रैंचाइज़ी की चौथी कड़ी है, जिसका निर्देशन ए. हर्षा ने किया है। यह फिल्म दक्षिण भारतीय सिनेमा की तर्ज पर भारी-भरकम एक्शन और खून-खराबे से भरी है, लेकिन कहानी और अभिनय के मामले में यह दर्शकों को निराश करती है।

टाइगर श्रॉफ, संजय दत्त, हरनाज संधू और सोनम बाजवा जैसे सितारों से सजी यह फिल्म तमिल फिल्म ‘ऐंधु ऐंधु ऐंधु’ पर आधारित है। आइए, जानते हैं इस फिल्म की खासियतें और कमियां:

कहानी का सार
फिल्म में रॉनी (टाइगर श्रॉफ) एक ऐसी लड़की, अलीशा (हरनाज संधू) से बेइंतहा प्यार करता है, जिसके बारे में लोग कहते हैं कि वह वास्तव में मौजूद नहीं है। एक हादसे से उबरने के बाद रॉनी को भ्रम होने लगता है, और वह अलीशा की तलाश में निकल पड़ता है। इस तलाश में वह अराजकता और हिंसा के भंवर में फंस जाता है। कहानी में संजय दत्त का किरदार चाको, एक खतरनाक खलनायक के रूप में सामने आता है, जो रॉनी के लिए चुनौती बनता है।

कमजोर कहानी और स्क्रिप्ट
‘बागी 4’ की सबसे बड़ी कमी इसकी कमजोर कहानी है। पहले हाफ में स्क्रिप्ट ठहर-सी जाती है, और दर्शकों को बांधे रखने में नाकाम रहती है। भाई (श्रेयस तलपड़े) और एक मजेदार पुलिसवाले (उपेंद्र लिमये) जैसे किरदारों को हल्का-फुल्का हास्य लाने के लिए जोड़ा गया है, लेकिन ये प्रयोग असफल रहते हैं। कहानी का रहस्य दूसरे हाफ में खुलता है, लेकिन वह इतना साधारण है कि लंबा इंतज़ार बेकार लगता है। लेखन में कमी साफ दिखती है, और कई दृश्य म्यूजिक वीडियो जैसे प्रतीत होते हैं।

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एक्शन और प्रोडक्शन डिज़ाइन
नाडियाडवाला ग्रैंडसन एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी इस फिल्म में भव्य सेट और शानदार एक्शन कोरियोग्राफी देखने को मिलती है। दक्षिण भारतीय सिनेमा की तरह, यहाँ हीरो कुल्हाड़ी और हथौड़े से दुश्मनों का सफाया करता है। हालांकि, यह हिंसा कई बार बेवजह और बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई लगती है। एक्शन सीन्स में दम है, लेकिन कहानी की कमी के कारण ये प्रभाव नहीं छोड़ पाते।

अभिनय में संजय दत्त चमके, टाइगर निराश
टाइगर श्रॉफ का अभिनय उनकी सीमाओं को उजागर करता है। भावनात्मक दृश्यों में वह केवल चेहरा बनाते और उछल-कूद करते नजर आते हैं। हरनाज संधू, जो मिस यूनिवर्स रह चुकी हैं, अपने डेब्यू में प्रभावित नहीं कर पातीं और उनकी परफॉर्मेंस सतही रहती है। दूसरी ओर, संजय दत्त अपने खलनायक किरदार चाको में जान डालते हैं और फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष बनकर उभरते हैं। सोनम बाजवा भी अपने सीमित रोल में गरिमा के साथ नजर आती हैं, जबकि सौरभ सचदेवा का खतरनाक अंदाज़ प्रभावशाली है।

तकनीकी पहलू
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर दूसरे हाफ में थोड़ा असर डालता है, लेकिन कुल मिलाकर यह कहानी को संभाल नहीं पाता। सिनेमैटोग्राफी और प्रोडक्शन डिज़ाइन में भव्यता दिखती है, लेकिन यह फिल्म को मनोरंजक बनाने के लिए काफी नहीं है। 157 मिनट की रनटाइम थोड़ी लंबी लगती है, जिसे और कसावट की जरूरत थी।

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किसके लिए है यह फिल्म?
अगर आपको बिना दिमाग लगाए देखने वाली एक्शन फिल्में पसंद हैं, जहाँ खून-खराबा और भारी-भरकम स्टंट्स का बोलबाला हो, तो ‘बागी 4’ आपके लिए हो सकती है। लेकिन अगर आप गहरी कहानी, मजबूत किरदार या भावनात्मक गहराई की उम्मीद रखते हैं, तो यह फिल्म आपको निराश कर सकती है।

बता दें कि ‘बागी 4’ भव्य एक्शन और सेट डिज़ाइन के बावजूद कमजोर स्क्रिप्ट और सतही अभिनय के कारण दम तोड़ देती है। संजय दत्त और सोनम बाजवा के प्रदर्शन इसे कुछ हद तक बचाते हैं, लेकिन टाइगर श्रॉफ का एक जैसा अभिनय और कहानी की कमी इसे औसत बनाती है। यह फिल्म वर्तमान में सिनेमाघरों में चल रही है।

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