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Saiyaara Film Review: अहान पांडे और अनीत पड्डा स्टारर फिल्म सैयारा का रिव्यू आया सामने, जानिए क्या है खास

Published on: 18 July 2025
Saiyaara Film Review: अहान पांडे और अनीत पड्डा स्टारर फिल्म सैयारा का रिव्यू आया सामने, जानिए क्या है खास

Saiyaara Film Review: ‘सैयारा’ के लिए जोरदार प्रचार नहीं हुआ, फिर भी यह फिल्म दो नए चेहरों, आहान पांडे और अनीत पड्ढा, के इर्द-गिर्द घूमती है। प्रमोशन में निर्देशक मोहित सूरी ने बताया कि दर्शक इसे ‘रॉकस्टार’ और ‘आशिकी 2’ से जोड़ रहे हैं। उनकी पत्नी ने मजाक में पूछा कि क्या उनके पास संजय लीला भंसाली जैसा अनोखा स्टाइल है, जिस पर वे मुस्कुराए।

दो दशक के करियर के बाद सूरी का अलग अंदाज साफ है, वे भावनाओं को नई कहानियों में ढालते हैं। उनका नायक अक्सर गुस्सैल और आत्म-हानिकारक होता है, नायिका भावनात्मक रूप से कमजोर।

‘सैयारा’ भी एक दर्दनाक पल से शुरू होती है। आहान का किरदार कृष गुस्से और सिगरेट की लत से ग्रस्त है, जो ‘कबीर सिंह’ की याद दिलाता है, एंट्री से ही उसका स्वभाव जाहिर हो जाता है। अनीत की वाणी शांत और मासूम है। सूरी का म्यूजिक और इमोशनल माहौल को पकड़ने का हुनर प्रभावशाली है।

फिल्म का साउंडट्रैक मजबूत है, जो कलाकारों की सीमित एक्टिंग को संभालता है। सूरी के किरदार अक्सर हालात से बड़ा बोझ ढोते हैं, परिणाम अच्छा-बुरा दोनों हो सकता है,‘सैयारा’ में भी यही देखने को मिलता है। उनकी फिल्में गंभीर होती हैं, ह्यूमर कम।

एक मजेदार पल तब आता है जब मास्टर्स डिग्री पर चुटकी ली जाती है।  आहान का पत्रकार पर हमला, नेपोटिज्म की तारीफ से नाराज होकर, हल्की हंसी पैदा करता है—वह नेपोटिज्म और टैलेंट पर लंबा भाषण भी देता है, व्यंग्य या संयोग, यह तो फिल्मकार ही बता सकते हैं।

कृष और वाणी के किरदार उलझे हुए हैं—कृष बेकाबू है, वाणी शांत पर सख्त। किस्मत उन्हें जोड़ती है, पर सीन और मोंटाज सतही रहते हैं, भावना की गहराई कम है। दोनों का दुखद अतीत उन्हें मुस्कुराने नहीं देता। बाद में वाणी की गहराई अनीत की शानदार एक्टिंग से उभरती है; महिला किरदारों को ग्लैमर से ऊपर उठाकर स्वतंत्र दिखाया गया है।

इंटरवल के बाद आहान का गुस्सा कम होता है, परिपक्वता आती है, और दोनों की केमिस्ट्री ईमानदार लगती है, पर कुछ सीन गति तोड़ते हैं। कृष का सुपरस्टार बनने का सफर जल्दी और अविश्वसनीय है। वाणी का पुराना प्यार भटकता सा लगता है। विजुअल्स ‘मलंग’ और इमोशन ‘आशिकी’ जैसी हैं, ‘यू, मी और हम’ की छाप भी दिखती है, अधिक बताना स्पॉइलर होगा।

फिल्म को नई जोड़ी का सूरी की सोच से तालमेल और टाइटल सॉन्ग बांधे रखता है, जो खूबसूरत है। बाकी गाने कम प्रभावी हैं, पर भावनाएं और ईमानदारी इसे खास बनाती हैं—क्योंकि प्यार कभी परफेक्ट नहीं होता

Saiyaara Film Review:

कलाकार: आहान पांडे, अनीत पड्ढा, वरुण बडोला, राजेश कुमार
निर्देशक: मोहित सूरी
भाषा: हिंदी
रेटिंग: 3/5 स्टार

‘सैयारा’ का रोमांचक अंत: प्यार की अधूरी कहानी

‘सैयारा’ का अंत दर्शकों को भावनात्मक रूप से झकझोरता है, जहां आहान पांडे (कृष) और अनीत पड्ढा (वाणी) की अधूरी प्रेम कहानी अपने चरम पर पहुंचती है। फिल्म की गति में उतार-चढ़ाव के बावजूद, अंतिम क्षणों में दोनों किरदारों का संघर्ष और सूरी का इमोशनल टच प्रभाव छोड़ता है।

कृष का गुस्सा और वाणी की शांति अंत में एक गहरे बंधन में बदलती है, पर किस्मत उन्हें एक-दूसरे से दूर कर देती है। यह दृश्य, जहां वाणी अपने नियमों को तोड़कर कृष के लिए खड़ी होती है, दिल को छू जाता है, लेकिन खुशी का अंत नहीं मिलता।

मोहित सूरी की खासियत, दर्द और जुनून, यहां भी बरकरार है। साउंडट्रैक का मधुर अंतिम गाना कहानी को और गहराई देता है, भले ही कुछ सीन जल्दबाजी में लगें। वाणी का दुखद अतीत और कृष का परिवर्तन दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।

महिला किरदारों की ताकत और उनकी आजादी फिल्म को अलग बनाती है। हालांकि, कहानी का तेजी से खत्म होना थोड़ा असंतोष छोड़ता है। फिर भी, नई जोड़ी का प्रयास और सूरी की ईमानदारी इसे यादगार बनाती है। प्यार की यह अधूरी गाथा सिखाती है कि भावनाएं परफेक्ट नहीं, पर असली होती हैं।

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