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Sleep Disturbances Mental Health: नींद में झटके, घबराहट और बार-बार जागना? मनोवैज्ञानिक बोलीं – ये मानसिक तनाव का बड़ा संकेत!

Sleep Disturbances Mental Health: नींद में झटके, घबराहट और बार-बार जागना? मनोवैज्ञानिक बोलीं – ये मानसिक तनाव का बड़ा संकेत!

Sleep Disturbances Mental Health: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद सबसे पहले कटौती की शिकार हो रही है। देर रात मोबाइल स्क्रॉल करना, काम-पढ़ाई का दबाव और लगातार चलने वाली चिंताएं धीरे-धीरे नींद छीन रही हैं। ज्यादातर लोग इसे सिर्फ थकान समझकर टाल देते हैं, लेकिन मनोविज्ञान की रिसर्च स्कॉलर हिमानी चौधरी बताती हैं कि नींद की कमी और उसमें आने वाली गड़बड़ियां अब एक बड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्या बन चुकी हैं।

नींद की समस्या सिर्फ कम सोना या देर से सोना नहीं है। कई लोग सोते समय या नींद के बीच अचानक झटका लगना, शरीर में करंट सा सनसनी, दिल का तेज धड़कना, घबराहट या डर महसूस करना और बार-बार नींद टूट जाना जैसी परेशानियां झेलते हैं। ये अनुभव इतने डरावने होते हैं कि व्यक्ति दोबारा सोने से भी डरने लगता है। नतीजा यह होता है कि डर और चिंता बढ़ती जाती है और नींद पूरी तरह बिगड़ जाती है, जो एक दुष्चक्र बन जाता है।

हिमानी चौधरी के अनुसार, ये झटके और असामान्य अनुभूतियाँ, इस बात का संकेत हैं कि दिमाग पूरी तरह शांत नहीं हो पा रहा। दिन भर की चिंताएं, भावनात्मक थकान और मानसिक दबाव शरीर को नींद में भी अलर्ट मोड में रखते हैं। व्यक्ति सो तो लेता है, लेकिन सुबह उठते ही थका-थका और बेचैन महसूस करता है। मानसिक ताजगी बिल्कुल नहीं मिलती।

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ये समस्याएं सीधे तौर पर अत्यधिक तनाव, चिंता और मानसिक थकान से जुड़ी हैं। पढ़ाई का बोझ, नौकरी की अनिश्चितता, पारिवारिक जिम्मेदारियां और भविष्य की फिक्र दिमाग को लगातार सक्रिय रखती हैं, जिसका सबसे बड़ा असर नींद पर पड़ता है। अगर इन संकेतों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो एंग्जायटी, डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, आत्मविश्वास की कमी, ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत और दिनभर की बेचैनी जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। कई लोग अलग-अलग डॉक्टरों के चक्कर काटते रहते हैं, जबकि असली वजह मानसिक तनाव और नींद की गड़बड़ी ही होती है।

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ऐसी स्थिति में मनोवैज्ञानिक थेरेपी सबसे प्रभावी मदद देती है। काउंसलिंग थेरेपी से व्यक्ति अपने डर और तनाव को समझ पाता है। कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) नींद से जुड़ी नकारात्मक सोच को कम करती है। रिलैक्सेशन थेरेपी, सांस के व्यायाम और ध्यान मन-शरीर को शांत कर झटकों और असामान्य अनुभूतियाँ, को घटाने में सहायक होते हैं। थेरेपी सिखाती है कि नींद से डरने की बजाय उसे स्वाभाविक रूप से अपनाया जाए।

परिवार और समाज की भूमिका भी बहुत महत्वपूर्ण है। घर में अक्सर इन समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसे ज्यादा सोचने की आदत या कमजोरी कहकर टाल दिया जाता है। इससे व्यक्ति अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाता और अंदर ही अंदर तनाव बढ़ता जाता है। परिवार अगर बिना जजमेंट के धैर्य से सुने और भावनात्मक सहारा दे, तो डर काफी कम हो सकता है। समाज को भी समझना होगा कि नींद में झटके या बार-बार जागना कोई नाटक नहीं, बल्कि वास्तविक मानसिक समस्या है। समय पर काउंसलर या मनोवैज्ञानिक से मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करना बड़ी मानसिक परेशानियों से बचा सकता है।

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हिमानी चौधरी का कहना है कि नींद शरीर और मन को आराम देने वाली सबसे सस्ती और प्रभावी दवा है। अच्छी नींद से याददाश्त बेहतर होती है, मन शांत रहता है और दिनभर की ऊर्जा मिलती है। जो लोग नियमित और पूरी नींद लेते हैं, वे मानसिक रूप से ज्यादा संतुलित और खुश रहते हैं। इसलिए नींद से समझौता करना बंद करें। अच्छी नींद अपनाएं, स्वस्थ और संतुलित जीवन पाएं। अंत में हिमानी ने एक बहुत ही सुंदर बात कही कि अच्छी नींद केवल आराम नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन की कुंजी है।

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