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Bijli Mahadev Ropeway Controversy: रोप-वे विवाद ने बढ़ाई टेंशन, श्रद्धालुओं को सावन माह में नहीं होंगे बिजली महादेव के दर्शन

Bijli Mahadev Ropeway Controversy: रोप-वे विवाद ने बढ़ाई टेंशन, श्रद्धालुओं को सावन माह में नहीं होंगे बिजली महादेव के दर्शन
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कुल्लू , 17 जुलाई 2025
Bijli Mahadev Ropeway Controversy: हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी में स्थित बिजली महादेव मंदिर इस सावन में पहली बार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिया गया है। मंदिर कमेटी ने देव आदेश के तहत अगले छह महीनों तक यहां कोई धार्मिक अनुष्ठान नहीं करने का फैसला लिया है। अब भक्तों को मंदिर के बाहर से ही महादेव के दर्शन करने होंगे।

मंदिर को सावन में बंद करना एक असामान्य कदम है, क्योंकि पारंपरिक रूप से यह दिसंबर की संक्रांति पर सर्दियों के लिए बंद होता है और महाशिवरात्रि पर फिर से खुलता है। जानकारी के अनुसार इस बंद के पीछे का कारण मंदिर परिसर में रोप-वे निर्माण को लेकर उठा विवाद। गुरवाणी के माध्यम से महादेव ने स्पष्ट रूप से रोप-वे निर्माण न करने का आदेश दिया है। साथ ही, मंदिर क्षेत्र में नई दरारें दिखाई देने से स्थानीय लोगों में भय का माहौल है।

उल्लेखनीय है कि बिजली महादेव रोप-वे प्रोजेक्ट के लिए एक कंपनी को टेंडर दिया गया था, और इस दौरान 72 पेड़ काटे जा चुके हैं। काटी गई लकड़ी अभी भी वहीं पड़ी है, लेकिन स्थानीय लोगों ने इसे हटाने से मना कर दिया है। पिछले कई सालों से इस रोप-वे को लेकर विवाद जारी है। 25 जुलाई को स्थानीय लोग एक बार फिर महादेव परिसर में रोप-वे के विरोध में विशाल प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

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रोप-वे के विरोध में बुजुर्ग शिवनाथ ने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण नहीं रोका गया तो वे आत्मदाह करेंगे। उन्होंने 1988 की त्रासदी का भी जिक्र किया, जब बिजली महादेव परिसर में हेलीपैड बनाने की कोशिश के दौरान एक बड़ी आपदा आई थी। शिवनाथ ने दृढ़ता से कहा, “हम किसी भी हालत में रोप-वे को लगने नहीं देंगे।”

वहीँ बिजली महादेव के कारदार विनेंद्र जंबाल ने बताया, “देव आदेश के मुताबिक, छह महीनों तक मंदिर में कोई भी गतिविधि नहीं होगी। सावन में भी मंदिर बंद रहेगा, और भक्त बाहर से ही दर्शन कर सकते हैं। यहां लगने वाले खीर भंडारे पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।”

स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर परिसर में पर्यटकों की बढ़ती संख्या और नियमों का उल्लंघन मंदिर की पवित्रता को प्रभावित कर रहा है। कुछ पर्यटक सूतक-पातक के दौरान भी मंदिर में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे मंदिर की शांति भंग होती है। इसलिए, भंडारे जैसी गतिविधियां अब मंदिर से दूर, रास्ते में ही आयोजित की जा रही हैं।

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