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Himachal Ambulance Strike: हिमाचल प्रदेश में 5 अप्रैल से थम जायेंगे 108 और 102 एंबुलेंस के पहिये, कर्मचारियों ने दी राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी

HP 108 102 Ambulance Strike: हिमाचल प्रदेश में 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और ओवरटाइम भुगतान जैसी मांगों को लेकर हड़ताल का ऐलान किया है। यूनियन का आरोप है कि कोर्ट के आदेशों के बाद भी सरकार सुनवाई नहीं कर रही है।
Published on: 4 April 2026
Himachal Ambulance Strike: हिमाचल प्रदेश में 5 अप्रैल से थमेगा 108 और 102 एंबुलेंस का चक्का, कर्मचारियों ने दी राज्यव्यापी हड़ताल की चेतावनी

Himachal Ambulance Strike: हिमाचल प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जीवनरेखा मानी जाने वाली 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के पहिये 5 अप्रैल से अगले एक सप्ताह तक थम सकते हैं। बता दें कि  राज्यस्तरीय एंबुलेंस कांट्रेक्ट यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा सकती है।

यूनियन द्वारा जारी सूचना के अनुसार, यह हड़ताल 5 अप्रैल शाम 8:00 बजे से शुरू होकर 11 अप्रैल सुबह 8:00 बजे तक जारी रहेगी। इस दौरान आपातकालीन स्थिति में मरीजों को एंबुलेंस सेवाएं मिलना कठिन हो जाएगा। पूर्व के अनुभवों को देखते हुए, हालांकि सरकार अन्य सरकारी वाहनों से वैकल्पिक व्यवस्था करती रही है, परंतु दूरदराज के क्षेत्रों में गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

यूनियन ने स्पष्ट किया कि 14 दिन पहले लिखित नोटिस देने के बावजूद सरकार और संबंधित कंपनी द्वारा बातचीत की कोई पहल नहीं की गई है। कर्मचारियों की मुख्य मांगे और शिकायतें निम्नलिखित हैं:

अवैध निष्कासन: बिना किसी ठोस कारण के लगभग 50 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, जिन्हें तत्काल बहाल करने की मांग की गई है।

वेतन विसंगति: कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन 12 घंटे काम करने के बावजूद ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है।

प्रशासनिक प्रताड़ना: ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) प्रक्रियाओं में त्रुटियों के साथ-साथ कर्मचारियों ने मानसिक और प्रशासनिक उत्पीड़न की शिकायत की है।

कानूनी आदेशों की अवहेलना का आरोप
यूनियन का दावा है कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट और श्रम कार्यालय द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों को वर्षों से लागू नहीं किया गया है। कर्मचारियों के अनुसार, बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उनकी बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है।

वेतन और बहाली के अलावा, यूनियन ने एंबुलेंस वाहनों की नियमित मेंटेनेंस और इंश्योरेंस व्यवस्था को दुरुस्त करने की भी मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। साथ ही, बीमारी की स्थिति में पूर्ण वेतन भुगतान की व्यवस्था की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है।

यूनियन ने अपील की है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो वे हड़ताल के निर्णय को वापस लेकर सेवाओं को सुचारु रूप से जारी रख सकते हैं। फिलहाल, सरकार की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बता दें कि यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों से जुड़े मामलों में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजेएम कोर्ट शिमला और श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद कई वर्षों से स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि इन आदेशों के बाद भी उनकी मांगों को लागू नहीं किया गया, जिससे उन्हें लगातार परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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