Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

हिमाचल हाईकोर्ट की चयन आयोग को नसीहत- ज्यादा अंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को जनरल कैटेगरी में ही दें स्थान

HP TGT Cutoff Dispute: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने टीजीटी (आर्ट्स) भर्ती में आरक्षण और मेरिट के नियमों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी ज्यादा अंक लाता है, तो उसे सामान्य श्रेणी में ही जगह मिलनी चाहिए।
Himachal News Himachal Pradesh High Court , Himachal High Court , Himachal High Court Decision, MV Act Vimal Negi Himachal High Courtdeath case Himachal Panchayat Election Himachal High Court Himachal Panchayat Chunav HP High Court

Himachal High Court: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने टीजीटी (आर्ट्स) शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों और मेरिट के मूल सिद्धांतों के अनुपालन को लेकर राज्य सरकार और राज्य चयन आयोग को सख्त नसीहत दी है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भर्ती एजेंसियां इस गंभीर कानूनी विषय और आरक्षण के नियमों के क्रियान्वयन को लेकर किसी गलतफहमी में जी रही हैं।

अदालत के इस कड़े रुख के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बता दें कि यह पूरा मामला राज्य चयन आयोग द्वारा 25 मई 2025 को जारी किए गए विज्ञापन से जुड़ा है। आयोग ने पोस्ट कोड-25001 के अंतर्गत टीजीटी (आर्ट्स) के कुल 425 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इस विज्ञापन के तहत सामान्य (अनारक्षित) वर्ग के लिए 151 पद निर्धारित किए गए थे, जबकि अनुसूचित जाति (बीपीएल) श्रेणी यानी एससी (बीपीएल) के लिए 17 पद आरक्षित किए गए थे।

लिखित परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब परिणाम घोषित किए गए, तो उसमें मेरिट सूची के आवंटन को लेकर अनियमितता सामने आई। मामले में याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दलील प्रस्तुत करते हुए बताया कि उन्होंने एससी (बीपीएल) श्रेणी के तहत आवेदन किया था। अंतिम परिणाम में याचिकाकर्ता ने 64 अंक प्राप्त किए और वह अपनी श्रेणी की वेटिंग लिस्ट में पहले स्थान पर रहीं। इस श्रेणी में अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थी के 64.58 अंक थे, जबकि सामान्य वर्ग की कटऑफ 71.31 दर्ज की गई थी।

इसे भी पढ़ें:  Himachal News: चौथी बार CCTNS में पहला स्थान हासिल करने पर सीएम ने हिमाचल पुलिस की सराहना की

मामले की सुनवाई के दौरान चयन आयोग के सचिव द्वारा उच्च न्यायालय में एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई। इस रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि एससी (बीपीएल) श्रेणी के तीन अभ्यर्थियों ने सामान्य वर्ग की अंतिम कटऑफ 71.31 से भी अधिक अंक हासिल किए थे। इसके बावजूद, आयोग ने उन उच्च अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को नियमनुसार सामान्य (ओपन) श्रेणी में स्थानांतरित करने के बजाय एससी (बीपीएल) आरक्षित कोटे के भीतर ही समायोजित रख लिया।

इसे भी पढ़ें:  Himachal News: आपदा से प्रभावित हिमाचल को शीघ्र उपलब्ध करवाया जाए विशेष राहत पैकेज - सीएम सुक्खू

राज्य चयन आयोग ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि प्रदेश सरकार के कार्मिक विभाग द्वारा 12 नवंबर 2014 को जारी निर्देशों के अनुसार हॉरिजॉन्टल (क्षैतिज) आरक्षण- जैसे बीपीएल, पूर्व सैनिक, दिव्यांगजन आदि श्रेणियों में ‘ऑन मेरिट’ का सिद्धांत लागू नहीं किया जाता है। आयोग का कहना था कि इसी नियम के आधार पर अभ्यर्थियों को उनकी मूल श्रेणी में ही रखा गया था।

उच्च न्यायालय ने चयन आयोग के इस तर्क को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित प्रशासनिक अधिकारी इस कानूनी विषय पर गंभीर भ्रम की स्थिति में हैं। न्यायमूर्ति ने देश की सर्वोच्च अदालत के ऐतिहासिक फैसले आरके सभ्रवाल बनाम पंजाब राज्य (1995) का प्रमुखता से हवाला दिया और आरक्षण के वैधानिक नियमों की व्याख्या की।

अदालत ने अपने निर्देश में साफ किया कि स्थापित कानून के अनुसार, यदि कोई आरक्षित श्रेणी का अभ्यर्थी अपनी योग्यता के बल पर सामान्य वर्ग के अंतिम चयनित अभ्यर्थी के बराबर या उससे अधिक अंक लाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से सामान्य श्रेणी में गिना जाना चाहिए। जब ऐसे मेधावी अभ्यर्थी सामान्य श्रेणी में शिफ्ट होते हैं, तो आरक्षित वर्ग की जो सीटें रिक्त होती हैं, उन्हें उस वर्ग के अगले मेरिट वाले अभ्यर्थियों (जैसे वेटिंग लिस्ट में मौजूद उम्मीदवार) से भरा जाना अनिवार्य है।

इसे भी पढ़ें:  Himachal Politics : लोकतांत्रिक प्रकिया से चुने प्रतिनिधियों को काले नाग की संज्ञा देना अनुचित : विपिन परमार

उच्च न्यायालय के इस बेहद कड़े और सख्त रुख के बाद राज्य चयन आयोग के पास अपनी गलती स्वीकार करने या संशोधित पक्ष रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। आयोग के प्रतिनिधियों ने अदालत से मामले पर अपना नया और औपचारिक जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की गुहार लगाई। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आयोग की इस याचिका को स्वीकार करते हुए अपना रुख स्पष्ट करने के लिए दो सप्ताह का समय प्रदान किया है। इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त को निर्धारित की गई है।

Himachal High CourtHP Selection CommissionHP TGT Arts RecruitmentReservation Rules Court OrderRK Sabharwal Case

Join WhatsApp

Join Now