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हिमाचल पंचायत चुनाव में निर्विरोध जीतने वाली पंचायतों को मिलेगा तगड़ा इनाम

Himachal Panchayat Election Incentive: राज्य सरकार ने स्थानीय निकायों को सुदृढ़ करने के लिए प्रोत्साहन राशि में किया ऐतिहासिक इजाफा, अब निर्विरोध चुनी गई जिला परिषद को मिलेंगे एक करोड़ रुपये, अधिसूचना जारी।
Published on: 21 April 2026
Himachal Panchayat Election: हिमाचल पंचायत चुनाव में निर्विरोध जीतने वाली पंचायतों को मिलेगा तगड़ा इनाम

Himachal Panchayat Election: हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश सरकार ने निर्विरोध चुनी जाने वाली पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि में कई गुना वृद्धि कर दी है। इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर विकास कार्यों को गति देना और आपसी सहमति को बढ़ावा देना है।

नई प्रोत्साहन राशि का विवरण
नई व्यवस्था के तहत, सरकार ने ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन राशि तय की है। सरकार की अधिसूचना के अनुसार,:

  • यदि किसी ग्राम पंचायत के सभी सदस्य, प्रधान और उप-प्रधान निर्विरोध चुने जाते हैं, तो उन्हें 25 लाख रुपये की राशि मिलेगी।
  • इसी प्रकार, पंचायत समिति के लिए यह प्रोत्साहन राशि 50 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
  • वहीं, जिला परिषद के लिए अब 1 करोड़ रुपये तक का इनाम दिया जाएगा। यह पूरी राशि सीधे संबंधित संस्थाओं को विकास कार्यों के लिए प्रदान की जाएगी।

पुरानी और नई व्यवस्था में अंतर

सरकार द्वारा किए गए इस बड़े इजाफे से पूर्व की स्थिति काफी भिन्न थी। इससे पहले सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि की दरें निम्नवत थीं:

  • ग्राम पंचायत: 10 लाख रुपये
  • पंचायत समिति: 5 लाख रुपये
  • जिला परिषद: 15 लाख रुपये

नई नीति के माध्यम से सरकार ने इन राशियों में भारी वृद्धि की है, ताकि स्थानीय निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम बनाया जा सके और गांवों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिल सके।

योजना की शर्तें और उद्देश्य
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए यह अनिवार्य है कि पंचायत के सभी पद जिसमे सदस्य, प्रधान और उप-प्रधान बिना किसी मुकाबले के चुने जाएं। यदि एक भी पद पर मतदान की स्थिति उत्पन्न होती है, तो पूरी पंचायत इस विशेष प्रोत्साहन योजना के दायरे से बाहर हो जाएगी।

प्रशासन का मानना है कि पंचायत चुनावों के दौरान गांवों में अक्सर गुटबाजी और आपसी कलह की स्थिति पैदा हो जाती है। निर्विरोध चुनाव को बढ़ावा देने से समाज में आपसी सहमति और सौहार्द बढ़ेगा, तनाव में कमी आएगी और चुनाव पर होने वाला अनावश्यक खर्च भी बचेगा।

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि जनप्रतिनिधियों का पूरा ध्यान सीधे गांव के विकास कार्यों, जैसे सड़क निर्माण, पेयजल व्यवस्था, स्वच्छता और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित रहे। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य की कितनी पंचायतें इस मॉडल को अपनाकर विकास की दिशा में आगे बढ़ती हैं।

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