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हाटी समुदाय ने गिरिपार को जनजातिय क्षेत्र घोषित करने की उठाई मांग, उग्र आंदोलन की भी दी चेतावनी

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सिरमौर।
सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलाने के लिए शिलाई में आयोजित हाटी खुमली समारोह का आयोजन किया गया। इस खुमली में शिमला लोकसभा क्षेत्र के सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप, शिलाई के विधायक हर्षवर्धन चौहान, श्रीरेणुकाजी के विधायक विनय कुमार, शिलाई के पूर्व विधायक एवं राज्य खाद्य आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर और पूर्व जिला परिषद सिरमौर के अध्यक्ष दलीप चौहान ने भी भाग लिया।

बता दें कि सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की मांग अब और तेज होती जा रही है, और देरी से जनता में रोष बढ़ता जा
रहा है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तेज बारिश के बावजूद भी हजारों लोग इस आयोजन में जुटे। युवाओं तथा महिलाओं सहित हजारों लोगों ने एक स्वर में आवाज उठाई। जब तक हमें हमारा हक नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

शनिवार को शिलाई लोक निर्माण विश्राम गृह में हाटी की महाखुमली आयोजित की गई। इस खुमली में शिलाई, श्रीरेणुकाजी, पच्छाद व पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्रों के 144 पंचायतों के युवा, महिला सहित हजारों लोगों ने भाग लिया। साथ ही गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा दिलवाने के लिए अपना समर्थन दिया। खुमली में युवाओं में जोश दिखा और एलान किया की अगर सरकार ने हमारे हक को नहीं दिया, तो अब बड़े स्तर पर आंदोलन किया जायेगा।

वहीं केंद्रीय हाटी समिति के अध्यक्ष डा अमीचंद कमल व महासचिव कुंदन सिंह शास्त्री ने कहा कि उन्होंने दस्तावेजों सहित सभी औपचारिकताएं पूरी कर प्रदेश व केंद्र सरकार को कई बार दे दी है। अब उन्हें केवल अपना हक चाहिए। महाखुमली में आए लोगों ने कहा कि 2014 में तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नाहन के चौगान मैदान में गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय दर्जा देने का वादा किया था। इसके साथ ही 2019 में तत्कालीन केंद्रीय जनजातीय मंत्री ने हरिपुरधार में जनसभा को संबोधित करते हुए जल्द इस क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की बात कही थी।

लोगों ने कहां की केंद्र और प्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है। अब वादों और आश्वासनों से नहीं, बल्कि जनजाति क्षेत्र का दर्जा लेकर ही रहेंगे। नहीं तो आंदोलन को तेज कर दिया जाएगा। यदि केंद्र सरकार प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले गिरिपार क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र घोषित नहीं करती, तो उसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में भाजपा को भुगतना होगा।

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