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Bilaspur: चोखणाधार पेयजल योजना पर शातिर चोरों की नज़र, काट कर ले गए दो फुट पाइप..!

Bilaspur चोखणाधार पेयजल योजना पर शातिर चोरों की नज़र, काट कर ले गए दो फुट पाइप..!

सुभाष कुमार गौतम | घुमारवीं
Bilaspur News: बिलासपुर जिला के घुमारवीं क्षेत्र में चोखणाधार पेयजल योजना से दो फुट पाइप लाइन का टुकड़ा चोरी होने की घटना सामने आई है। इस घटना के कारण मुख्य टैंक से अन्य टैंकों तक पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराना था, जहां लोग पानी की कमी से जूझते थे। लेकिन इस घटना ने योजना की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार लगभग दो साल पहले, घुमारवीं के सीरखड्ड क्षेत्र से चोखणाधार पेयजल योजना शुरू की गई थी। लेकिन कुछ शातिर व्यक्तियों ने योजना की इस सप्लाई पाइप लाइन को ही नुकसान पहुंचा दिया। जंगल में मेन टैंक से आगे, पाइप लाइन को काटकर दो फुट का टुकड़ा चोरी कर लिया गया। यह तो पता नहीं है कि  आखिर शातिर दो फुट के इस टुकड़े का क्या करेंगे, लेकिन इस घटना ने योजना की गुणवत्ता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या बोले अधिकारी 

विभाग के जेई रोहित चंदेल ने इस घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पाइप उस स्थान से काटा गया है जहां चट्टान की वजह से इसे जमीन के अंदर दबाना संभव नहीं था। ओपन पाइप होने के कारण शातिरों ने इसे आसानी से काट लिया।

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इस पाइप को जोड़ने के लिए वैल्डिंग का काम किया जाएगा। जंगल में बिजली की अनुपलब्धता के कारण जनरेटर और लेबर का अतिरिक्त खर्च आएगा। रोहित चंदेल ने कहा कि आज इस पाइप लाइन की मरम्मत का काम किया जाएगा ताकि लोगों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े।

नियमों का उल्लंघन: पाइप लाइन जमीन के अंदर क्यों नहीं?

यह घटना केवल चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभाग और ठेकेदारों के कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करती है। नियमों के अनुसार, पाइप लाइन को जमीन के अंदर 2-3 फीट गहरी खुदाई करके बिछाया जाना चाहिए। लेकिन इस योजना में पाइप को खुले में बिछा दिया गया, जिससे इसे आसानी से काटा जा सका।

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योजना के कार्यों की निगरानी विभाग के अधिकारियों का काम होता है। संतोषजनक काम होने पर ही ठेकेदार को भुगतान किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि काम मानकों के अनुरूप नहीं हुआ और बिना समुचित जांच के, योजना का उद्घाटन जल्दबाजी में कर दिया गया।

राजनीतिक दबाव और जल्दबाजी में उद्घाटन

इस योजना का उद्घाटन विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले किया गया था। राजनीतिक दबाव के चलते इसे आनन-फानन में चालू कर दिया गया। ठेकेदार ने भुगतान लेकर अपना काम पूरा कर लिया, और अधिकारी भी बदल गए। ऐसे में हर कोई अपनी जबाबदेही से छूट जाता। लेकिन खराब गुणवत्ता और निगरानी की कमी का खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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