Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। मंगलवार को दिए अपने बयान में उन्होंने कहा कि देश में युवाओं की आवाज को लगातार दबाया जा रहा है। दिल्ली में सोमवार को प्रदर्शनकारी युवाओं पर किया गया लाठीचार्ज मोदी सरकार के पतन की शुरुआत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा केंद्र सरकार लोकतांत्रिक संवाद में बिल्कुल विश्वास नहीं रखती और केवल सत्ता का दुरुपयोग कर शासन चलाना चाहती है। छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिवंगत वीरभद्र सिंह के पुत्र विक्रमादित्य सिंह ने समाचार एजेंसी ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत के दौरान यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि छात्र अपने सुरक्षित भविष्य और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे।

छात्र मांग कर रहे थे कि देश की परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हो, लेकिन सरकार ने उनसे बात करने के बजाय आंसू गैस के गोले छोड़े और उन पर लाठीचार्ज करवाया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। विक्रमादित्य सिंह ने नीट परीक्षा का जिक्र करते हुए कहा कि पेपर लीक की घटना महज एक पहलू है, जबकि हकीकत यह है कि पूरी शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार की चपेट में आ चुकी है।
नीट पेपर लीक मामले के बाद से ही छात्र शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने युवाओं की आवाज सुनना पूरी तरह बंद कर दिया है। आज देश के कोने-कोने में छात्रों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। कोलकाता से लेकर मुंबई, बेंगलुरु और शिमला तक हर जगह छात्र सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि प्रदर्शनकारी छात्र उन परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग भी कर रहे हैं, जिनके बच्चों ने नीट पेपर लीक के कारण हताश होकर कथित रूप से आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया। मंत्री ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी त्रासदियों और छात्रों की लगातार हो रही मौतों के बाद भी केंद्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है।
उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ तो प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंचों से कहते हैं कि युवा इस देश का भविष्य हैं, लेकिन दूसरी तरफ उसी युवा पर पुलिस की लाठियां बरसाई जा रही हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार को इस पूरे घटनाक्रम और युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के मुद्दे पर देश के सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अपने बयान में मंत्री ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार केवल “साम, दाम, दंड, भेद” के माध्यम से सत्ता चलाने में विश्वास रखती है। इसके साथ ही विपक्षी दलों के सांसदों को दबाव बनाकर भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। जब भी समाज का कोई भी वर्ग सरकार की नीतियों पर सवाल पूछता है या अपने अधिकार मांगता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रविरोधी करार दे दिया जाता है।
विक्रमादित्य सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज समाज का हर वर्ग केंद्र सरकार की नीतियों और रवैये से निराश हो चुका है। आने वाले समय में जनता का यही असंतोष एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेगा, जिसके स्पष्ट संकेत अब हर तरफ दिखाई देने लगे हैं।


















