Ravneet Singh Bittu Resignation: केंद्रीय रेल और खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया है, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी एक आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है।
बता दें कि इस्तीफा मंजूर होने के साथ ही रवनीत सिंह तुरंत प्रभाव से केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सदस्य नहीं रहेंगे।उल्लेखनीय है कि रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को ही समाप्त हो गया था। भारतीय जनता पार्टी ने 18 जून को हुए राज्यसभा चुनाव में बिट्टू को दोबारा उम्मीदवार घोषित नहीं किया था। हालांकि, इसके बाद भी उनसे इस्तीफे की मांग नहीं की गई थी, लेकिन अब शुक्रवार को उनका इस्तीफा औपचारिक रूप से मंजूर कर लिया गया है।

इस्तीफा स्वीकार होने के बाद रवनीत सिंह बिट्टू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा, “मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल से शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे भारत सरकार में राज्य मंत्री के तौर पर देश की सेवा करने का मौका दिया। भारत के लोगों, खासकर मेरे प्यारे पंजाब की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।”
उन्होंने आगे लिखा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा, राष्ट्रवाद और विकसित भारत के विजन के आदर्शों के प्रति समर्पित हूं। जनता की सेवा का मेरा सफर नए समर्पण के साथ जारी रहेगा।”
गौरतलब है कि रवनीत सिंह बिट्टू अगस्त 2024 से जून 2026 तक राजस्थान से राज्यसभा के सदस्य के रूप में कार्यरत थे। वह पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे दिवंगत बेअंत सिंह के पोते हैं। रवनीत बिट्टू कांग्रेस के टिकट पर तीन बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और 2024 के आम चुनाव से ठीक पहले वह भाजपा में शामिल हुए थे।
दरअसल यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय जनता पार्टी 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी में गंभीरता से जुट रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ते हुए बिट्टू कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग से 20,942 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे।
इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में रवनीत बिट्टू ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जहां उनका मुकाबला शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान से था। उस चुनाव में वह सुखबीर सिंह बादल से हार गए थे और भगवंत मान के बाद तीसरे स्थान पर रहे थे।
पंजाब के आगामी राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए भाजपा आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने की तैयारी कर रही है। इस महीने की शुरुआत में पंजाब दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अकाली दल पर निशाना साधते हुए उस पर अपने स्वार्थी हितों को पूरा करने और पंजाब के लोगों की परवाह न करने का आरोप लगाया था।
बता दें कि 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की थी, जबकि भाजपा को महज दो सीटों से संतोष करना पड़ा था। वर्तमान में मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ बेअदबी वीडियो मामले और कांग्रेस की अंदरूनी कलह के बीच भाजपा 2027 के विधानसभा चुनावों में अपने प्रदर्शन में बड़े सुधार की उम्मीद कर रही है।


















