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प्रियंका गांधी ने जिन्हें कहा ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’,  जानिए कौन हैं IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि

Professor V Kamakoti Biography: लोकसभा में शिक्षा सुधार विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के 'गोमूत्र विशेषज्ञ' वाले बयान पर भारी हंगामा हुआ, जानिए कौन हैं आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर कामकोटि।
Published on: 29 July 2026
IIT Madras Director Kamakoti: प्रियंका गांधी ने जिन्हें कहा 'गोमूत्र विशेषज्ञ',  जानिए कौन हैं IIT मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि

IIT Madras Director Kamakoti: लोकसभा में शिक्षा सुधार विधेयक पर चर्चा के कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी द्वारा शिक्षा सुधार के लिए बनाई गई नई कमेटी में एक पूर्व आईबी चीफ, एक आईटी कंपनी के संस्थापक और एक गोमूत्र विशेषज्ञ को शामिल किया गया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि इन लोगों को शिक्षा व्यवस्था के बारे में क्या समझ होगी और यही सच है।

हालांकि प्रियंका गांधी ने अपने भाषण में सीधे तौर पर किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी इस टिप्पणी को आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी. कामकोटि से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रियंका गांधी की इस टिप्पणी के तुरंत बाद सत्ता पक्ष की ओर से जोरदार विरोध शुरू हो गया। भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने इस बयान को एक सम्मानित विद्वान का अनादर करार देते हुए कड़ा ऐतराज जताया। इस विवाद के बाद सभी जानना चाहते हैं कि कौन हैं प्रोफ़ेसर कामकोटि, और प्रधानमंत्री ने उन्हें इतनी बड़ी जिमेदारी क्यों दी।

कौन हैं प्रोफ़ेसर कामकोटि
बता दें कि प्रोफेसर कामकोटि वीझिनाथन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के निदेशक हैं। उन्होंने 17 जनवरी 2022 को आईआईटी मद्रास के नए निदेशक के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह आईआईटी मद्रास के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में फैकल्टी सदस्य के रूप में कार्यरत रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने संस्थान में इंडस्ट्रियल कंसल्टेंसी एंड स्पॉन्सर्ड रिसर्च (आईसीएसआर) के एसोसिएट डीन के पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं।

प्रोफेसर कामकोटि का प्रशासनिक और वैज्ञानिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। वह भारत सरकार की कई महत्वपूर्ण एजेंसियों और संस्थाओं से जुड़े रहे हैं, जिनमें भारत सरकार के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजरी बोर्ड के सदस्य के रूप में उनकी भूमिका भी शामिल है। वर्ष 2017 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने प्रोफेसर कामकोटि को विभिन्न क्षेत्रों के विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम करने वाली टास्क फोर्स का चेयरमैन नियुक्त किया था।

तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में प्रोफेसर कामकोटि का सबसे प्रमुख योगदान भारत के पहले स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ का विकास है। उन्होंने उस शोध टीम का कुशल नेतृत्व किया जिसने ‘शक्ति’ माइक्रोप्रोसेसर को डिजाइन किया और उसे सफलतापूर्वक शुरू किया। इसका इस्तेमाल मोबाइल कंप्यूटिंग डिवाइस और नेटवर्किंग सिस्टम में किया जा सकता है। यह संचार और रक्षा क्षेत्रों में आयातित माइक्रोप्रोसेसर पर निर्भरता कम करने में मदद करता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर के माइक्रोप्रोसेसर के बराबर क्षमता रखता है।

वैज्ञानिक और शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रोफेसर कामकोटि को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजी इनोवेशन नेशनल फेलोशिप (2020), आईईएसए टेक्नो विजनरी अवॉर्ड (2018), आईबीएम फैकल्टी अवॉर्ड (2016), डीआरडीओ एकेडमी एक्सीलेंस अवॉर्ड (2013), और आईआईटी मद्रास यंग फैकल्टी रिकग्निशन अवॉर्ड (2007) प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा उन्हें इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक साइंसेज श्रेणी में वासविक रिसर्च अवॉर्ड (2017) और एडवांस्ड कंप्यूटिंग एंड कम्युनिकेशन सोसाइटी की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया गया है।

प्रोफ़ेसर कामकोटि और गोमूत्र पर उनके विचार
प्रोफेसर कामकोटि गोमूत्र के कथित औषधीय और वैज्ञानिक गुणों पर दिए गए अपने बयानों को लेकर पहले भी सार्वजनिक चर्चा में रहे हैं। जनवरी 2025 में चेन्नई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया था कि गोमूत्र में फंगल संक्रमण, बैक्टीरिया और सूजन के खिलाफ प्रभावी गुण मौजूद हैं। उनके इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया था।

जिसके बाद आलोचकों ने इन दावों को गैर-वैज्ञानिक बताते हुए देश के प्रमुख तकनीकी संस्थान के प्रमुख द्वारा ऐसी बातें करने पर सवाल उठाए थे। इन आलोचनाओं और विवाद पर अपने बचाव में प्रोफेसर कामकोटि ने स्पष्ट किया था कि सहकर्मी-समीक्षित (पीयर-रिव्यूड) वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित पांच शोध-पत्र गोमूत्र के संक्रमण-रोधी (एंटी-इन्फेक्टिव) गुणों के दावों का समर्थन करते हैं। उन्होंने आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (करनाल, हरियाणा) द्वारा किए गए 2021 के एक अध्ययन का उल्लेख किया था, जो नेचर समूह की पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।

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