Bilaspur RLA Scam: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी कार्यालय से जुड़े वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े में जांच एजेंसियों के हाथ बड़ी सफलता लगी है। शुरुआती जांच में जहां 500 वाहनों में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही थी, वहीं पिछले छह वर्षों के सरकारी रिकॉर्ड को खंगालने पर यह आंकड़ा बढ़कर करीब 2500 तक पहुंच गया है।
बता दें कि इस फर्जीवाड़े इन सभी 2500 वाहनों को प्रशासन की ओर से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। बिलासपुर आरएलए कार्यालय में फर्जीवाड़े का यह खेल जनवरी 2020 से लगातार चल रहा था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि फर्जीवाड़े का यह जाल केवल बिलासपुर या हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से वाहनों को लाकर यहां पंजीकृत कराया जा रहा था।

गिरोह के सदस्य दूसरे राज्यों से पुरानी और इस्तेमाल की जा चुकी गाड़ियों का प्रबंध करते थे। इसके बाद उन वाहनों के दस्तावेजों में हेरफेर किया जाता था और उनके चैसी नंबर बदलकर बिलासपुर RLA में उन्हें नई गाड़ियों के रूप में दर्ज करा दिया जाता था। इस पूरे खेल में स्थानीय विभागीय कर्मियों, डीलरों और बिचौलियों के बड़े नेटवर्क की मिलीभगत सामने आई है।
जानकारी के मुताबिक इस अंतरराज्यीय फर्जीवाड़े की कार्यप्रणाली सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाने से जुड़ी हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी वाहन की वास्तविक बाजार कीमत 40 लाख रुपये होती थी, तो फर्जी कागजात तैयार कर उसकी कीमत कागजों में मात्र 10 लाख रुपये दर्शाई जाती थी। इस तरह वाहन की वास्तविक कीमत और कागजी कीमत के बीच अंतर छिपाकर कम टैक्स जमा कराया जाता था। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का सीधा नुकसान पहुंचाया गया।
दरअसल इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ उस समय हुआ जब नई दिल्ली के चाणक्यपुरी थाने में एक वाहन चोरी की शिकायत दर्ज हुई। दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने जब चोरी की जांच आगे बढ़ाई तो बिलासपुर RLA कार्यालय से जुड़े फर्जी पंजीकरण के सूत्र हाथ लगे। इसके बाद दिल्ली क्राइम ब्रांच की टीम ने बिलासपुर पहुंचकर सरकारी रिकॉर्ड खंगाले, जिसके आधार पर RLA कार्यालय में तैनात सीनियर असिस्टेंट सुभाष चंद को गिरफ्तार किया गया।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन और जांच एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए पिछले छह साल का पूरा रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब वाहन मालिकों, संबंधित डीलरों और बिचौलियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
बिलासपुर के उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि RLA ब्रांच मामले में करीब 2500 वाहनों को ब्लैकलिस्ट किया गया है और सभी मामलों में सरकारी राजस्व की रिकवरी शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फर्जीवाड़े के जरिए बचाए गए टैक्स की पूरी रिकवरी की जाएगी और निर्धारित राशि जमा होने के बाद ही नियम अनुसार आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।


















