Health News: भारत में हर उम्र के लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल और दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जो दुनिया के बाकी हिस्सों से कहीं ज्यादा है। डॉक्टरों के मुताबिक इसके पीछे सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई वजहें हैं। इनमें जेनेटिक कारण, बदलती जीवनशैली, गलत खानपान, तनाव, नींद की कमी, डायबिटीज, मोटापा, प्रदूषण और इलाज के प्रति लापरवाही शामिल है। इन कारणों को समझना जरूरी है, ताकि दिल की बीमारियों को समय रहते रोका जा सके।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डॉ राजीव मेहरोत्रा, मेदांता हॉस्पिटल नॉएडा के क्लीनिकल प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी डायरेक्टर, बताते हैं कि इसके पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे अहम वजह जेनेटिक्स है। भारतीयों में कुछ खास जीन होते हैं जो इंसुलिन रेजिस्टेंस, पेट के आसपास चर्बी, डायबिटीज और खराब कोलेस्ट्रॉल का कारण बनते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस से ब्लड शुगर बढ़ता है और शरीर में फैट ज्यादा जमा होता है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए भारत में दिल की बीमारी कम उम्र में शुरू हो जाती है और ज्यादा गंभीर भी होती है।
भारत अब दुनिया की डायबिटीज कैपिटल कहलाता है। हाई ब्लड शुगर धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, सूजन पैदा करता है और कोलेस्ट्रॉल के प्लाक आसानी से बनने लगते हैं। ज्यादा ब्लड शुगर से नसों में सूजन और चोट होती है, जिससे कोलेस्ट्रॉल की परतें जल्दी जमने लगती हैं। समय के साथ ये परतें खून के बहाव को रोक देती हैं। डायबिटीज वाले लोगों में यह प्रक्रिया जल्दी शुरू होती है, इसलिए 30, 40 या 50 साल की उम्र में ही हार्ट अटैक के मामले सामने आ रहे हैं। इसके साथ मोटापा भी एक बड़ी वजह बन चुका है।
पेट का मोटापा सबसे खतरनाक है। कमर के आसपास की चर्बी एक्टिव रहती है, जो सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ाती है। कई लोग बाहर से पतले दिखते हैं लेकिन अंदर से ‘विसरल फैट’ ज्यादा होता है, जिसे ‘बाहर पतले, अंदर मोटे’ कहते हैं। इससे कोलेस्ट्रॉल बिगड़ता है और दिल का जोखिम बढ़ता है। बता दें कि कई लोग बाहर से दुबले दिखते हैं, लेकिन अंदर से उनके शरीर में ज्यादा चर्बी होती है। यह छिपी हुई चर्बी कोलेस्ट्रॉल बढ़ाकर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ाती है।
शहरी जीवन ने आदतें बदल दी हैं। डेस्क जॉब, स्क्रीन टाइम ज्यादा, कम चलना-फिरना और गाड़ियों का इस्तेमाल से फिजिकल एक्टिविटी घट गई है। इससे मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ता है, वजन बढ़ता है, कोलेस्ट्रॉल खराब होता है और ब्लड शुगर हाई रहता है।
खान-पान भी बड़ा कारण है। पहले का घर का बना साबुत अनाज, दाल-सब्जी वाला खाना अब फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड, मीठे ड्रिंक्स और ट्रांस फैट से भरपूर हो गया है। ये खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ाते हैं और अच्छा कोलेस्ट्रॉल (HDL) घटाते हैं। फल-सब्जियां और फाइबर कम खाने से समस्या और बढ़ती है।
लंबे समय का तनाव, नींद की कमी, प्रदूषण और हाई ब्लड प्रेशर भी जोखिम बढ़ाते हैं। तनाव से हार्मोन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। कम नींद से मोटापा और डायबिटीज का खतरा बढ़ता है। प्रदूषण सूजन पैदा कर धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा करता है।
डॉक्टर का कहना है कि कई लोगों को बीमारी का पता होने के बावजूद वे नियमित इलाज नहीं कराते। कुछ लोग घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं, तो कुछ इसे उम्र से जुड़ी बीमारी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। पारिवारिक इतिहास भी एक बड़ा जोखिम है, इसलिए बचाव की शुरुआत कम उम्र से ही जरूरी है।
डॉक्टर कहते हैं कि जेनेटिक्स नहीं बदला जा सकता, लेकिन जीवनशैली बदलकर खतरा बहुत कम किया जा सकता है। रोज 30 मिनट तेज चलें, संतुलित खाना खाएं, प्रोसेस्ड फूड छोड़ें, तनाव कम करें, अच्छी नींद लें और नियमित जांच करवाएं। समय पर दवाएं लेने और स्वस्थ आदतें अपनाने से दिल मजबूत रह सकता है। सही जीवनशैली, नियमित जांच, दवाइयों का पालन, संतुलित आहार, रोजाना व्यायाम, तनाव कम करना और पूरी नींद लेकर दिल की बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

















