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Himachal News: हिमाचल शिक्षा बोर्ड की बड़ी चूक, पहले फेल बताया गया छात्र बाद में प्रथम श्रेणी में हुआ पास..!

Published on: 24 May 2025
Himachal News: हिमाचल शिक्षा बोर्ड की बड़ी चूक, पहले फेल बताया गया छात्र बाद में प्रथम श्रेणी में हुआ पास..!

अनिल शर्मा | फतेहपुर
Himachal News: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) के जमा दो (12वीं) के परीक्षा परिणाम के बाद चौंकाने वाले मामने सामने आया है, जिसने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसा ही एक मामला ग्रेटवे पब्लिक स्कूल, राजा का तालाब के छात्र के साथ भी  पेश आया।

दरअसल, निक्षय पठानिया, पुत्र रवींद्र पठानिया, को मई माह में घोषित परिणाम में तीन विषयों में फेल बताया गया था। लेकिन पुनर्मूल्यांकन के बाद निक्षय न केवल पास हुआ, बल्कि 68.8% अंकों के साथ प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुआ। इस घटना ने बोर्ड की लापरवाही को उजागर किया है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

उल्लेखनीय है कि मई 2025 में घोषित जमा दो के परीक्षा परिणाम में निक्षय पठानिया को अंग्रेजी में 24 अंक, फिजिक्स में 17 अंक और केमिस्ट्री में 16 अंक मिले थे, जिसके आधार पर उसे फेल घोषित किया गया। इस परिणाम से निराश निक्षय और उनके परिवार ने अंग्रेजी विषय के पेपर के पुनर्मूल्यांकन की मांग की।

पुनर्मूल्यांकन के बाद निक्षय के अंग्रेजी में 52 अंक, फिजिक्स में 59 अंक और केमिस्ट्री में 59 अंक दर्ज किए गए। दो अन्य विषयों के अंकों को मिलाकर कुल 344 अंक प्राप्त हुए, जिसका प्रतिशत 68.8% रहा। इस तरह, पहले फेल बताया गया छात्र प्रथम श्रेणी में पास हो गया।

पास होने पर परिवार में खुशी का माहौल, बोर्ड की कार्यप्रणाली खड़ा पर सवाल

निक्षय के प्रथम श्रेणी में पास होने से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। लेकिन साथ ही, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के कर्मचारियों और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। इस तरह की लापरवाही कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, लोग यह पूछ रहे हैं कि जब केवल अंग्रेजी पेपर का पुनर्मूल्यांकन मांगा गया था, तो फिजिक्स और केमिस्ट्री के अंकों में इतना बड़ा बदलाव कैसे हुआ? पहले फेल बताए गए छात्र के अचानक इतने अधिक अंक प्राप्त करने से यह साफ है कि मूल्यांकन में गंभीर लापरवाही बरती गई।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि इस तरह की चूक से छात्रों का भविष्य दांव पर लग सकता है। कई बार ऐसी गलतियों के कारण बच्चे मानसिक तनाव और निराशा में गंभीर कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। हालांकि इस पर बोर्ड की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। लेकिन ऐसी घटनाएं न केवल छात्रों के मनोबल को प्रभावित करती हैं।

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