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Eating Fiber: भरपूर फाइबर खा रहे हैं, फिर भी नहीं जा रहा कब्ज ?, तो न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए ये छिपे हुए कारण!

Eating Fiber: फाइबर भरपूर खा रहे हैं, फिर भी कब्ज नहीं जा रहा? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताए ये छिपे हुए कारण!

Eating Fiber: अकसर फाइबर का नाम सुनते ही ज़्यादातर लोग यही मान लेते हैं कि अगर खाने में फाइबर बढ़ा दिया जाए तो पाचन अपने आप ठीक हो जाएगा। बात सुनने में आसान लगती है, लेकिन हकीकत हमेशा ऐसी नहीं होती। कई लोग पर्याप्त फाइबर लेने के बावजूद कब्ज की समस्या से परेशान रहते हैं। इसका कारण यह है कि फाइबर अकेले काम नहीं करता।

आहार फाइबर एक तरह का कार्बोहाइड्रेट होता है, जो पौधों से मिलता है। शरीर इसे न तो पूरी तरह पचा पाता है और न ही अवशोषित कर पाता है। इसका मुख्य काम पाचन को बेहतर बनाना और मल त्याग में मदद करना है। फाइबर दो प्रकार का होता है, घुलनशील और अघुलनशील।

घुलनशील फाइबर पानी में घुलकर पेट में जैल जैसा बनता है। यह पाचन की गति को धीमा करता है और कोलेस्ट्रॉल व ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है। ओट्स, मटर, बीन्स और इसबगोल इसके प्रमुख स्रोत हैं। वहीं अघुलनशील फाइबर पानी में नहीं घुलता, बल्कि भोजन में भराव बढ़ाकर उसे आंतों से आगे बढ़ने में सहायक होता है। साबुत गेहूं का आटा, गेहूं का चोकर, दालें और मेवे इसके अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

इसके बावजूद कब्ज की समस्या बनी रहती है, क्योंकि फाइबर को असर दिखाने के लिए शरीर की सक्रियता जरूरी होती है। रोज़ाना चलना, हल्का योग, स्ट्रेचिंग या खाने के बाद थोड़ी देर टहलना आंतों की हलचल को बढ़ाता है। आंतों को नियमित मूवमेंट की ज़रूरत होती है।

पानी की भूमिका भी उतनी ही अहम है। फाइबर मल में पानी खींचता है, जिससे वह नरम बनता है। अगर शरीर में पानी की कमी हो, तो फाइबर उल्टा असर कर सकता है। दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। सुबह गुनगुना पानी पीने से भी पेट साफ होने में मदद मिल सकती है।

संतुलन भी जरूरी है। फाइबर तब बेहतर काम करता है जब उसे प्रोटीन और हेल्दी फैट के साथ लिया जाए। फल, सब्जियां और साबुत अनाज को दही, अंडे, पनीर, दाल, मेवे या बीजों के साथ शामिल करने से पाचन ज्यादा स्थिर रहता है।

फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना भी जरूरी है। अचानक बहुत ज्यादा फाइबर लेने से आंतों पर दबाव पड़ सकता है। शरीर को ढलने के लिए समय चाहिए। हर हफ्ते करीब 10 से 15 प्रतिशत फाइबर बढ़ाने से आंतों और अच्छे बैक्टीरिया को अनुकूलन का मौका मिलता है।

तनाव भी पाचन को प्रभावित करता है। आंतें सीधे नर्वस सिस्टम से जुड़ी होती हैं। अनियमित भोजन, नींद की कमी और जल्दबाज़ी में खाना पाचन को बिगाड़ सकता है। समय पर और आराम से खाना, साथ ही पर्याप्त नींद लेना पाचन को बेहतर बना सकता है।

न्यूट्रिशनिस्ट एक्सपर्ट के अनुसार, “कब्ज सिर्फ फाइबर की समस्या नहीं है। यह पूरे सिस्टम से मदद की मांग करता है।” यानी सही पाचन के लिए फाइबर के साथ-साथ गतिविधि, पानी, संतुलित आहार और तनाव नियंत्रण भी उतना ही जरूरी है।

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