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वोट चोरी विवाद पर Rahul Gandhi का बड़ा बयान, ‘शपथपत्र क्यों दूं, यह उनका डेटा है’

वोट चोरी विवाद पर Rahul Gandhi का बड़ा बयान, 'शपथपत्र क्यों दूं, यह उनका डेटा है'
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EC vs Rahul Gandhi:  बिहार में मतदाता सूची संशोधन और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के सांसदों के विरोध प्रदर्शन के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शपथपत्र पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते हुए तीखा बयान दिया।

मीडिया से बातचीत में राहुल ने कहा, “मैं शपथपत्र पर हस्ताक्षर क्यों करूं? यह डेटा उनका है, मेरा नहीं। उन्हें अपनी वेबसाइट से लेना चाहिए। वे सिर्फ ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। यह सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ है। चुनाव आयोग कुछ छिपाने की कोशिश में है, लेकिन सच जल्द सामने आएगा।”

राहुल ने आगे कहा, “भारत के लोकतंत्र की स्थिति देखिए। 300 सांसद मिलकर चुनाव आयोग को एक दस्तावेज सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई। वे डर रहे हैं कि अगर 300 सांसदों की सच्चाई सामने आई, तो क्या होगा? यह अब राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत की लड़ाई है। कर्नाटक में हमने साफ दिखाया कि यह ‘एक व्यक्ति, कई वोट’ का मामला था। पूरा विपक्ष इसके खिलाफ लड़ रहा है, और अब चुनाव आयोग के लिए छिपना मुश्किल होगा।”

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कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, “पुलिस और सरकार हमें 30 सेकंड भी मार्च नहीं करने दे रही। यह कैसा लोकतंत्र है, जहां सांसदों को चुनाव आयोग तक जाने की आजादी नहीं? वे कह रहे हैं कि सिर्फ 30 लोग जा सकते हैं, तो कम से कम उन्हें तो कार्यालय तक जाने दिया जाए।”

हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “क्या जेल की सलाखें राहुल गांधी और विपक्ष को रोक सकती हैं? अब देश का नारा है- ‘बोल रहा है पूरा देश, वोट हमारा छू के देख।’ जनता ने मोदी सरकार और चुनाव आयोग की साझेदारी को खारिज कर दिया है।”

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि संसद के बाहर लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। उन्होंने कहा, “विपक्षी सांसदों को चुनाव आयोग तक मार्च करने से रोका गया। चुनाव आयोग को ‘चुराव आयोग’ नहीं बनना चाहिए।”

विपक्षी सांसदों ने सोमवार को बिहार में मतदाता सूची के विशेष संशोधन और कथित वोट चोरी के खिलाफ संसद भवन से मार्च शुरू किया, लेकिन पुलिस ने संसद मार्ग पर ही उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

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