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Sirmour: कफोटा-कोटी रोड पर एफडीआर तकनीक का सफल ट्रायल…

Sirmour: कफोटा-कोटी रोड पर एफडीआर तकनीक का सफल ट्रायल...
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रवि तोमर, शिलाई
Sirmour News: हिमाचल प्रदेश के शिमला ज़ोन में सड़कों के निर्माण को लेकर एक नई और पर्यावरण अनुकूल तकनीक की शुरुआत हुई है। कफोटा से कोटी तक बनने वाली सड़क पर पहली बार एफडीआर (फुल डेप्थ रिक्लेमेशन) तकनीक का सफल ट्रायल किया गया है। यह ट्रायल नाहन सर्कल के तहत किया गया और इसे सफल माना गया है।

एफडीआर तकनीक के ज़रिए सड़क की खुदाई में निकले पुराने मटेरियल को ही दोबारा उपयोग में लाया जाता है, जिससे नई सड़क बनाई जाती है। इससे न केवल समय और लागत की बचत होती है, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता। इस तकनीक से बनने वाली सड़कें पारंपरिक बिटुमिन सड़क की तुलना में ज़्यादा मजबूत और टिकाऊ होती हैं।

एफडीआर तकनीक से सड़क निर्माण की रफ्तार भी तेज होती है। इसमें बजरी और चारकोल जैसी सामग्रियों का दोबारा उपयोग किया जाता है, जिससे प्रदूषण भी कम होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक कारगर साबित होती है, तो भविष्य में हिमाचल की कई सड़कें इसी तकनीक से बनाई जाएंगी।

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उल्लेखनीय है कि  नवंबर 2023 में एफडीआर तकनीक को लेकर हिमाचल पथ निर्माण विभाग (एचपीपीडब्ल्यूडी) ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक प्रस्तुति दी थी। इसके बाद सीएम ने पीएमजीएसवाई-3 के तहत पर्यावरण अनुकूल सड़कों के निर्माण का निर्देश दिया था। फिलहाल प्रदेश के 10 ज़िलों में लगभग 1100 किलोमीटर सड़कों का निर्माण इसी तकनीक से किया जा रहा है। शिमला ज़ोन की तीन प्रमुख एफडीआर सड़कें, रामपुर घाट – नवादा, जमटा – बिरला, कफोटा – कोटी इसी तकनीक से बन रही है।

हाल ही में एफडीआर तकनीक के तहत बन रही कफोटा-कोटी सड़क का निरीक्षण किया गया। इस दौरान शिलाई के कार्यकारी अभियंता, ट्रांसलिंक इंफ्रास्ट्रक्चर कंसलटेंट के प्रतिनिधि, अधीक्षण अभियंता, एसडीओ गुलाब पुंडीर, जेई लाल सिंह चौहान और पीएमयू टीम के वरिष्ठ सदस्य मौजूद रहे। डिप्टी टीम लीडर सुधीर गुप्ता ने कहा कि यह तकनीक प्रदेश के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है। अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संतोष जताया, साथ ही कुछ कमियों पर सुधार के निर्देश भी दिए।

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