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मंत्री के आदेशों की अनदेखी कर रहे अधिकारी, गंदा पानी पीकर कैसे स्वस्थ रहेंगे स्वास्थ्य मत्री के गढ़ में बच्चे

Published on: 13 September 2022
मंत्री के आदेशों की अनदेखी कर रहे अधिकारी, गंदा पानी पीकर कैसे स्वस्थ रहेंगे स्वास्थ्य मत्री के गढ़ में बच्चे

प्रजासत्ता |
हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार पर विपक्ष यह आरोप लगता रहा है कि सरकार की प्रदेश में अधिकरियों और कर्मचारियों पर पकड़ नहीं है। विपक्ष का यह आरोप हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और कसौली विधानसभा से विधायक डॉ. राजीव सैजल के विधानसभा क्षेत्र में पूरी तरह से पुख्ता होता नज़र आ रहा है। क्योंकि बे-लगामअधिकरियों और कर्मचारियों पर, न तो जनता की चुनी हुई सरकार और न ही उनके मंत्रियों के आदेशों का कोई असर होता है।

ऐसा ही एक मामला कसौली विधानसभा के अंतर्गत आने वाले आईपीएच विभाग धर्मपुर के अधिकरियों और कर्मचारियों में देखने को मिल रहा है। जहाँ मंत्री जी के कई बार आदेश देने के बाद भी कोटबेजा पंचायत का एक बड़ा इलाका और उसके अंतर्गत आने वाले तीन स्कूलों के बच्चे गंदा पानी पिने को मजबूर है। ऐसे में आप समझ सकते हो कि जिन मंत्री जी की उनके ही विधानसभा में कोई नही सुनता उनकी प्रदेश के अन्य जिलों में कौन सुनता होगा।

हालांकि आइपीएच विभाग स्थानीय ग्रामीणों द्वारा काम रोकने हवाला दे कर अपना बचाव करने की कोशिश करता नज़र आ रहा है। लेकिन ग्रामीणों ने लिखित रूप में कहा कि उन्हें पहले से जोड़ी गई पाइप लाइन जिसका डाया सवा इंच है, लगाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन अगर विभाग बिना पूछे बड़े डाया का पाइप अपनी मर्जी से लगाता तो इसका विरोध रहेगा, क्योंकि ज्यादा पानी उठाये जाने से उनकी जमीने पानी के बिना बंजर हो जाएँगी।

बता दें कि बिते दिन स्वस्थ्य मंत्री राजीव सैजल ने ग्राम पंचायत कोटबेजा में लोगों की समस्याएं सुनी उस दौरान भी माध्यमिक पाठशाला गुनाई जिसका अब दर्जा अब बढ़कर हाई स्कूल हो चूका है के मुख्याध्यापक नरोतम वर्मा ने मंत्री जी के सामने स्कूल में आने वाले गंदे पानी का मुद्दा उठाया था, तब मौके पर आईपीएच विभाग धर्मपुर के एसडीओ और एक्सईएन सोलन भी मौजूद रहे। उस दौरान अधिकरियों ने जल्द स्वच्छ पानी मुहैया कारवाने का आश्वाशन दिया था। उससे पहले प्रजासत्ता के संपादक द्वारा भी आईपीएच विभाग के एसडीओ से पानी स्पलाई को फिलटर बेड से होकर लोगों तक पहूँचाने के सवाल पर एसडीओ ने एक सप्ताह का समय माँगा था। गुनाई स्कूल के मुख्याध्यापक नरोतम वर्मा ने भी खुद कई बार इस बारे में आईपीएच विभाग के अधिकारियों से बात की लेकिन जब मंत्री जी के आदेशों का ही उन पर कोई असर नहीं हुआ तो आम जनता की वह कैसे सुनेंगे।

दरअसल माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं कसौली विधायक राजीव सैजल को मंत्री बने हुए लगभग साढ़े चार साल का समय पूरा हो गया है उनके मंत्री बनते ही कोटबेजा पंचायत के गुनाई में एक स्वागत कार्यक्रम का आयोजन किया गया था उस दौरान इलाके के लोगों ने पानी की समस्या को लेकर बताया था कि आईपीएच द्वारा सीधा नदी से उठाकर पानी की सप्लाई दी जा रही है उस दौरान मंत्री जी ने फिल्टर बैड और पानी की ट्रीटमेंट के लिए टैंक निर्माण की घोषणा भी की थी। घोषणा पर कुछ हद तक काम हुआ लेकिन भ्रष्टाचार और विभाग की लेट लतीफी के चलते हैं अभी भी लोगों को गंदा पानी पीने को मिल रहा है। विभाग ने पिछले 4 सालों में फिल्टर बेड का निर्माण तो करवा दिया लेकिन चालू नहीं करवाया पाया है और ना ही पानी के ट्रीटमेंट के लिए कोई बंदोबस्त कर पाया है जिससे लोगों में काफी रोष पनप रहा है।

बता दे कि बीते दिनों माध्यमिक स्कूल गुनाई की एसएमसी की मीटिंग में भी इस मुद्दे को लेकर काफी गहमागहमी हुई थी, जिसके बाद आईपीएच विभाग के एसडीओ धर्मपुर ने एक सप्ताह के भीतर पानी के ट्रीटमेंट और फिल्टर बेड को चालू करने की बात कही थी। लेकिन लगभग 2 माह का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं गया है। लेकिन अभी भी लोग गंदा पानी पीने को मजबूर है। लगता है विभाग के आला अधिकारी और कर्मचारी अपनी ड्यूटी अच्छे से नही निभा रहे हैं। नही तो भ्रष्टाचार और लापरवाह आईपीएच कर्मी के खिलाफ कारवाई हो चुकी होती।

वहीं अगर बात करे टैंक निर्माण को लेकर तो उसमे भी भ्रष्टाचार हुआ और आरसीसी टैंक में दरारें पड़ गई बाद में आईपीएच विभाग के अधिकारियों ने अपने भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए दूसरे ठेकदार से उसे रिपेयर कर दिया। लेकिन अभी तक उसे इस्तेमाल में नही लाया जा सकता है और जनता के लाखों रुपए खर्च कर बने यह फिल्टर बेड और ट्रीटमेंट टैंक सफेद हाथी बना हुआ है। या यूं कह लें की सरकार का विभाग की विभाग के अधिकारियों पर कोई पकड़ नहीं है ।माननीय सिंचाई एवम जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह जी ने मंत्री पद ग्रहण करते ही पीने के पानी की सप्लाई और उनके रख रखाव को लेकर आदेश जारी किए थे लेकिन साढ़े चार साल का समय बीत गया वह आदेश बस हवा में ही रह गए।

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