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India Bond Market: भारत के बॉन्ड बाजार में हल्की कारोबार, निवेशक राज्य उधारी नीलामी पर नजर रखे हुए

State Development Loans: राज्य विकास ऋण (SDL) की आने वाली नीलामियों से पहले भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में कारोबार धीमा रहा। निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और बड़ी खरीदारी से बच रहे हैं। अब सबकी नजर यील्ड में होने वाली हलचल और इसके राजकोषीय असर पर टिकी है।
Published on: 24 February 2026
India Bond Market: भारत के बॉन्ड बाजार में हल्की कारोबार, निवेशक राज्य उधारी नीलामी पर नजर रखे हुए

India Bond Market:  मंगलवार सुबह भारतीय सरकारी बॉन्ड में ज्यादा हलचल नहीं दिखी। कीमतें एक छोटे दायरे में ही घूमती रहीं। निवेशक अभी ऊंची कीमत पर बॉन्ड खरीदने से बच रहे हैं, क्योंकि राज्य सरकारें बड़ी मात्रा में कर्ज लेने वाली हैं। हालांकि, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड थोड़ी नरम होने से भारतीय बाजार को थोड़ा सहारा मिला।

क्या हो रहा है?
2035 में पूरा होने वाला 6.48% ब्याज वाला सरकारी बॉन्ड (जिसे बेंचमार्क बॉन्ड कहा जाता है) की यील्ड सुबह करीब 6.70% थी। याद रखें कि जब बॉन्ड की कीमत बढ़ती है तो यील्ड घटती है, और जब कीमत गिरती है तो यील्ड बढ़ती है।

एक ट्रेडर के मुताबिक, बाजार की अगली दिशा इस पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकारों की कर्ज नीलामी कैसी रहती है।
-अगर नीलामी में अच्छी मांग रही तो यील्ड नीचे आ सकती है।
-अगर मांग कमजोर रही तो यील्ड तेजी से ऊपर जा सकती है।

राज्य सरकारें कितना कर्ज ले रही हैं?
राज्य सरकारें इस हफ्ते लगभग 44,550 करोड़ रुपये उधार लेने वाली हैं। यह इस वित्त वर्ष (जो 31 मार्च को खत्म होगा) की सबसे बड़ी साप्ताहिक उधारी है। ज्यादा सप्लाई आने से बाजार में दबाव बना हुआ है।

आरबीआई से उम्मीद
डीलरों को उम्मीद है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) जरूरत पड़ने पर बाजार को संभाल सकता है। RBI ने इस साल बड़ी मात्रा में बॉन्ड खरीदकर बाजार को सहारा दिया है।

केंद्र सरकार की भी नीलामी
शुक्रवार को केंद्र सरकार 32,000 करोड़ रुपये के 10 साल वाले 2035 बॉन्ड बेचेगी। यह नीलामी बताएगी कि निवेशकों की मांग कैसी है और आगे यील्ड किस दिशा में जा सकती है।

वैश्विक असर
दुनिया में भी हालात पर नजर है। खासकर अमेरिका के बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों पर। हाल में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से तेल महंगा हुआ था। अगर तेल महंगा रहता है तो भारत में महंगाई बढ़ सकती है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के एक अधिकारी ने कहा कि तेल महंगा होने से भारत में लागत बढ़ेगी, महंगाई बनी रह सकती है और सरकार व RBI के पास नीतिगत फैसले लेने की गुंजाइश कम हो सकती है।

ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (OIS) बाजार में भी ज्यादा कारोबार नहीं हुआ। ट्रेडर नए संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। कुल मिलाकर, बाजार अभी सतर्क है और आने वाली नीलामियों पर सबकी नजर टिकी हुई है।

(1 डॉलर = 90.9870 भारतीय रुपये)

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