PM Manmohan Singh Coal Scam: ओडिशा के तलाबीरा कोयला खदान आवंटन से जुड़े चर्चित कोयला घोटाले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को देश की शीर्ष अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए इस मामले को मेरिट के आधार पर पूरी तरह बंद करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही निचली अदालत द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री को जारी किए गए समन को भी सुप्रीम कोर्ट ने सिरे से रद्द कर दिया है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की तीन सदस्यीय पीठ कर रही थी। पीठ ने मामले की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि सेशंस जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने और मामले पर संज्ञान लेने का कोई ठोस और न्यायसंगत कारण मौजूद नहीं था। अदालत ने अपने आदेश में स्पेशल लीव पिटिशन को स्वीकार करते हुए विशेष अदालत के पुराने आदेशों को निरस्त कर दिया।

दरअसल, यह पूरा विवाद वर्ष 2004 से 2005 के बीच ओडिशा के तलाबीरा कोयला खदान के आवंटन में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। उस दौरान यह आरोप लगाया गया था कि कोयला ब्लॉक्स का आवंटन बिना किसी पारदर्शिता के और मनमाने तरीके से निजी कंपनियों को किया गया था। इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों और मीडिया में भारी हंगामा देखने को मिला था, जिसके बाद जांच की आंच तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह तक जा पहुंची थी।
उल्लेखनीय है कि जांच के दौरान सीबीआई को पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ कोई भी ठोस या प्रत्यक्ष सबूत हासिल नहीं हुआ था। इसके मद्देनजर साल 2014 में जांच एजेंसी ने अदालत में दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर केस को बंद करने की सिफारिश की थी। हालांकि, साल 2015 में ट्रायल कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और पूर्व पीएम को समन जारी कर दिया था। इसके बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2015 को सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन पर अंतरिम रोक लगा दी थी। उस दौरान डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, अश्वनी कुमार, विवेक तन्खा और हरिन पी रावल ने अदालत में पक्ष रखा था। हालिया सुनवाई के दौरान पूर्व पीएम का प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने किया।
अदालत में दलीलें पेश करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा था कि स्क्रीनिंग कमेटी की सिफारिश के इतर हिंडाल्को कंपनी को कोयला ब्लॉक आवंटित करने का फैसला पूरी तरह से एक प्रशासनिक निर्णय था और इसमें कुछ भी गैर-कानूनी नहीं था। उन्होंने तर्क दिया था कि खदान का आवंटन करना या उसे किसी निजी पार्टी को अलॉट करना कानूनन गलत नहीं है क्योंकि ऐसा करने पर कोई कानूनी रोक नहीं थी।
बता दें कि डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर 2024 को हुआ था। उनके निधन के डेढ़ साल से अधिक समय बीत जाने के बाद, अब सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी समन को चुनौती देने वाली याचिका को स्वीकार करते हुए मामले को हमेशा के लिए बंद कर दिया है और उन्हें इस मामले में पूर्ण रूप से बेदाग माना है।


















