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हिमाचल में पुलिस उत्पीड़न के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का बड़ा एक्शन, सोलन DC को मिला 15 दिनों का अल्टीमेटम!

NCSC Notice To DC Solan: सोलन जिले के कंडाघाट निवासी मोहित कुमार की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने जिला प्रशासन से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
Published on: 10 August 2026
हिमाचल में पुलिस उत्पीड़न के मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का बड़ा एक्शन, सोलन DC को मिला 15 दिनों का अल्टीमेटम!

National Commission for Scheduled Castes: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में पुलिस उत्पीड़न से जुड़ी एक शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने सोलन के उपायुक्त को औपचारिक नोटिस जारी कर मामले में 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। आयोग द्वारा जारी किए गए इस नोटिस की आधिकारिक तारीख 10 अगस्त 2026 दर्ज की गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह मामला सोलन जिले की कंडाघाट तहसील के अंतर्गत आने वाले गांव कल्होग के निवासी मोहित कुमार द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से संबंधित है। पीड़ित मोहित कुमार ने 9 जून 2026 को पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न के संबंध में आयोग के समक्ष अपनी शिकायत सौंपी थी। शिकायत का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस पूरे मामले की गहन जांच और पूछताछ करने का निर्णय लिया है।

जारी किए गए नोटिस के माध्यम से आयोग ने सोलन जिला प्रशासन से घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें घटना की सटीक तारीख, संबंधित थाना, अपराध की प्रकृति, पीड़ित तथा आरोपियों का पूरा विवरण, दर्ज एफआईआर नंबर एवं लगाई गई धाराएं, गिरफ्तारियों की स्थिति, चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट का विवरण और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दिए जाने वाले मुआवजे से संबंधित की गई कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट शामिल है।

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने अपने नोटिस में यह स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 15 दिनों की समयावधि के भीतर सोलन प्रशासन द्वारा संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं किया जाता है, तो आयोग कड़े संवैधानिक कदम उठाएगा। ऐसी स्थिति में आयोग भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त सिविल कोर्ट की शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से या उनके प्रतिनिधि के माध्यम से आयोग के समक्ष पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है।

बता दें कि कि यह पूरा घटनाक्रम सोलन के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है। हालांकि, आयोग की ओर से भेजे गए नोटिस में गौरव सिंह का नाम सीधे तौर पर आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है। दस्तावेज में शिकायत को केवल “पुलिस द्वारा उत्पीड़न” के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसलिए इस मामले में किसी भी अंतिम जिम्मेदारी या आरोप के साबित होने की बात प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

उल्लेखनीय है कि आईपीएस अधिकारी गौरव सिंह फरवरी 2026 तक सोलन के एसपी पद पर तैनात थे। इसके पश्चात उनका स्थानांतरण शिमला के एसपी के रूप में कर दिया गया था। फिलहाल, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा इस शिकायत को गंभीरता से लिए जाने और 15 दिनों के भीतर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगे जाने से जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल बढ़ गई है।

क्या है पूरा मामला  
दरअसल सोलन में तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गौरव सिंह के वाहन को रास्ता न देने से शुरू हुआ यह विवाद अब एक गंभीर कानूनी और मौलिक अधिकारों के मुद्दे में बदल गया है। पीड़ित मोहित कुमार के अनुसार, यह घटना 14 जून 2025 की है, जब वह एक निजी कंपनी में अपना कार्य समाप्त कर अपनी पत्नी के साथ भारत पेट्रोलियम पेट्रोल पंप से अपने गांव साधुपुल की ओर जा रहे थे।

उस दौरान सोलन के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक का वाहन पीछे से लगातार सायरन बजाने लगा। मोहित कुमार का कहना है कि उस समय सामने से वाहनों की भारी आवाजाही थी और उनके वाहन की गति 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा थी। इन विपरीत परिस्थितियों के कारण वे लगभग 100 मीटर तक पुलिस अधिकारी के वाहन को ओवरटेक करने या रास्ता देने की स्थिति में नहीं थे।

मोहित कुमार के अनुसार, कंडाघाट पहुंचने पर तत्कालीन एसपी के निर्देश पर उनके वाहन को पुलिस द्वारा जबरन रुकवाया गया। इसके बाद पुलिस द्वारा उनके खिलाफ वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के दुरुपयोग और अत्यधिक लापरवाही से ड्राइविंग करने के आरोपों में चालान जारी कर दिया गया। मोहित कुमार ने इस कार्रवाई का तुरंत विरोध किया और स्पष्ट किया कि उनके वाहन में लगे डैशकैम में पूरी घटना का वास्तविक वीडियो रिकॉर्ड हुआ था। उनका दावा है कि फुटेज में चालान में लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं दिखता।

प्रशासनिक कार्रवाई से असंतुष्ट होकर मोहित कुमार ने एक प्रमुख समाचार चैनल से संपर्क किया। इसके बाद ‘ट्रांसपोर्ट टीवी’ ने इस पूरी घटना की रिपोर्ट को प्रसारित किया और वाहन में लगे डैशकैम की वीडियो फुटेज को भी सार्वजनिक किया। मोहित कुमार के अनुसार, इस खबर के प्रसारित होने के बाद तत्कालीन पुलिस अधीक्षक के पीएसओ की शिकायत के आधार पर उनके तथा संबंधित समाचार चैनल के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। इसके बाद यह विवाद लगतार बढ़ता गया। मोहित कुमार बताते हैं कि इस विवाद के बाद वह बड़े मानसिक दबाव से गुजर रहे हैं।

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