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Himachal: सरकारी कर्मचारी भर्ती एवं सेवा की शर्तें विधेयक ध्वनिमत से पारित, विपक्ष का विरोध.!

Himachal News, HP Assembly Winter Session

Himachal News: हिमाचल में अनुबंध कर्मचारियों को अब 2003 से वरिष्ठता और इंक्रीमेंट जैसा लाभ नहीं मिलेगा और न ही ये क्लेम कर सकेंगे। क्योंकि सुक्खू सरकार ने शुक्रवार को कर्मचारियों की भर्ती और सेवा विधेयक को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद पारित कर दिया। संशोधन विधेयक में नियमित और अनुबंध कर्मचारियों की सेवा शर्तों को अलग किया गया है। विधेयक पर चर्चा के दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

विपक्ष के विधायकों त्रिलोक जमवाल, जेआर कटवाल, हंसराज और रणधीर शर्मा ने इस नए कानून का विरोध किया और पिछली तारीख से इसे लागू करने को कानून के विपरीत बताया, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तर्क दिया कि यह इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट पॉलिसी का कोई मतलब नहीं रह गया है।

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उन्होंने कहा कि एक त्रुटि कानून में रह गई थी जिसमें रेगुलर/कॉन्ट्रैक्ट शब्द लिखे जाने के कारण कोर्ट में सरकार केस हार रही थी। बाद में ध्वनि मत से सत्ता पक्ष की विधायकों ने बेंच थपथपाकर इस कानून को पारित कर दिया।

उन्होंने बताया कि अनुबंध नीति के अनुसार नियमित और अनुबंध सेवाओं में अंतर होता है। अनुबंध कर्मियों की सेवा शर्तों को नियमित से अलग तरीके से प्रबंधित करना आवश्यक है। उन्होंने तर्क दिया कि अनुबंध कर्मियों को नियमित कर्मियों के समान मानना राज्य के खजाने पर भारी बोझ डालेगा और नियमित कर्मियों की वरिष्ठता को भी प्रभावित करेगा।

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सीएम सुक्खू ने संशोधन विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव रखा। सुक्खू ने कहा कि त्रुटि के कारण नियमित कर्मचारियों को डिमोट करने की नौबत आ रही थी, जो नहीं आनी चाहिए। कुछ लोग कोर्ट जा रहे हैं और वहां से भी निर्णय आ रहे हैं कि लाभ पहले की तिथि से दिया जाए, ऐसे कर्मचारियों की संख्या ज्यादा नहीं है।

चर्चा के बाद अपने वक्तव्य में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि कुछ लोग कोर्ट में जाते हैं। कोर्ट से भी निर्णय आते हैं कि इस लाभ को पहले की तिथि से दिया जाए। यह एक त्रुटि है, उसे दुरुस्त किया जा रहा है। इस वजह से कितने ही कर्मचारियों को डिमोट करना होगा। कुछ कर्मचारियों ने ही यह मामला उठाया है।

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