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सुप्रीम कोर्ट में एडमिट हुई बिंदल के खिलाफ अपील, मुश्किल में घिर सकते हैं डॉ. साहब

Published on: 18 December 2020
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हिमाचल प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजीव बिंदल की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ गई हैं। 22 साल पुराना मामला सुप्रीम कोर्ट में खुल गया है। सोलन की जिला अदालत से मामला रद्द होने के बाद सुप्रीम कोर्ट इस संबंध में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका पर गुरुवार को हुई वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सरकार को नोटिस जारी किया गया है। बता दें कि याचिका नाहन के अनिल कुमार के द्वारा दायर की गई थी। जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार समेत 35 लोगों को नोटिस जारी किया है और 4 हफ्ते में जबाव मांगा गया है।

दरअसल, राज्य सरकार ने बीते साल बिंदल के खिलाफ इस केस को वापस ले लिया था और इसके बाद मामले को कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था। इसके साथ ही जानकारी यह भी मिली है कि अपील करता बेनामी संपत्तियों को लेकर भी जल्द एक बड़ा खुलासा कर सकता है। यही नहीं इसके अलावा भाजपा के एक दिग्गज नेता ने भी इस मामले को लेकर बेनामी संपत्तियों के सबूत जुटाने में बड़ी सहायता की है। अब कहा जा सकता है कि सरकार ने डॉ. बिंदल से कन्नी काटी है अब धीरे-धीरे यही सरकार कहीं बिंदल के खिलाफ शिकंजा ना कस दे।

गौरतलब हो कि वर्ष 1998 से 2000 के दौरान सोलन नगर परिषद के अध्यक्ष थे । उनके अध्यक्ष पद पर रहते हुए सोलन कमेटी में करीब 24 भर्तियां की गई थी। सोलन में एक शिकायतकर्ता के द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने नियम दरकिनार कर चहेतों को नौकरी पर रखा है ।भाजपा के बाद कांग्रेस जब सत्ता में आई तो इस मामले पर जांच बिठाई गई थी। कांग्रेस ने बिंदल के खिलाफ विजिलेंस में केस दर्ज करवाया। शुरूआत में राजीव बिंदल समेत 27 लोगों को आरोपी बनाया गया था।

ये मामला सोलन की अदालत में चल रहा था। जनवरी 2019 में सरकार ने ये मामला वापस ले लिया था।उधर, समाजसेवी अनिल कुमार ने इसकी पुष्टि भी की है। अनिल ने बताया कि इस मामले को लेकर आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे।

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