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Shoolini Fair 2025: हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनुपम मिसाल बना राज्यस्तरीय मां शूलिनी मेला..!

Published on: 20 June 2025
Shoolini Fair 2025: हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की अनुपम मिसाल बना सोलन का विश्वप्रसिद्ध राज्यस्तरीय मां शूलिनी मेला..!

Shoolini Fair 2025:सोलन का विश्वप्रसिद्ध राज्यस्तरीय मां शूलिनी मेला इस बार हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की एक ऐसी अनुपम मिसाल बन गया, जिसने हर दिल को छू लिया। यह मेला, जो माता शूलिनी की असीम कृपा और शक्ति का प्रतीक है, सैकड़ों वर्षों से सोलन शहर में भक्ति और उत्सव का रंग बिखेरता आ रहा है। इस मेले की सबसे मनमोहक परंपरा है माता शूलिनी की भव्य पालकी, जो रंग-बिरंगे फूलों और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित होकर शहर की परिक्रमा करती है।

ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों के जयकारों के बीच माता की यह शोभायात्रा हर साल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी रहती है।इस बार मेले में एक अनूठा और हृदयस्पर्शी दृश्य देखने को मिला। जब माता शूलिनी की पालकी माल रोड पर पहुंची, तो वहां मौजूद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने फूलों की वर्षा के साथ माता का भव्य और भावपूर्ण स्वागत किया।

रंग-बिरंगी पंखुड़ियों की बारिश और माता के जयकारों से माल रोड का माहौल भक्तिमय हो उठा। यह पहला अवसर था जब मुस्लिम भाइयों ने माता शूलिनी के सम्मान में इस तरह फूल बरसाए, जिसने आपसी सौहार्द और एकता का अद्भुत प्रदर्शन किया।

यह नजारा इतना भावुक और प्रेरणादायक था कि हर किसी के दिल को छूं गया। यह दृश्य न केवल सोलन के शूलिनी मेले की शोभा बढ़ा गया, बल्कि यह भी साबित कर गया कि प्रेम, सम्मान और भाईचारा किसी भी धर्म की सीमाओं से परे है। मुस्लिम समुदाय की यह पहल एक ऐसी मिसाल बन गई, जो सोलन के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गई।

उल्लेखनीय है कि देवी दुर्गा के स्वरुप मां शूलिनी देवी की छत्रछाया में सोलन निरन्तर उन्नति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। इसी आलोक में, प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मां शूलिनी की महिमा को समर्पित भव्य मेले का आयोजन हो रहा है, जो सोलनवासियों और श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और एकता का अनुपम संगम है।

सैकड़ों वर्षों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अपने में समेटे यह मेला केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि एक जीवंत परंपरा है, जो मां शूलिनी की असीम कृपा और भक्तों की अटूट श्रद्धा को दर्शाती है। इस मेले में जहां एक ओर भक्त मां के दर्शन और पूजन में लीन होकर अपने जीवन को धन्य करते हैं, वहीं दूसरी ओर यह मेला सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी मंच बनता है। नृत्य, संगीत, पारंपरिक शिल्प और स्थानीय व्यंजनों से सुसज्जित यह आयोजन सोलन की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सेतु भी है।

 

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