Dharamshala Central University: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस निर्माण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में राज्य सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि आगामी सुनवाई तक उसके आदेशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जाता है, तो हिमाचल प्रदेश के शिक्षा सचिव को खुद व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।
बता दें कि यह सख्त आदेश हिमाचल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया और न्यायाधीश न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने अतुल भारद्वाज द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किया। पीठ ने प्रशासनिक देरी और अदालत के निर्देशों की अनदेखी पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

30.04 करोड़ रुपये के फंड का मामला
इससे पहले 2 जून 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अदालत को अवगत कराया गया था कि धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस के निर्माण कार्य के लिए वन संरक्षण अधिनियम के तहत एक बड़ी धनराशि जमा की जानी है।
यह राशि कुल मिलाकर लगभग 30.04 करोड़ रुपये (₹3003.94 लाख) है। याचिका में बताया गया कि इस फंड को जमा करने की मांग सबसे पहली बार 26 जुलाई 2023 को ही उठाई गई थी। इस राशि में नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV), प्रतिपूरक वनीकरण और सीए (CA) स्कीम पर 5% आकस्मिक व्यय जैसे प्रमुख घटक शामिल हैं।
जून के आदेशों का नहीं हुआ पालन
2 जून को जारी अपने आदेश में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह राशि जमा कराने के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित की थी और इस संबंध में एक आवश्यक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था। हालांकि, 22 जुलाई 2026 को हुई नवीनतम सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह बात उजागर हुई कि 2 जून के अदालती आदेशों का पालन अब तक नहीं किया गया है। सरकारी मशीनरी द्वारा बरती जा रही इस ढिलाई को अदालत ने गंभीरता से लिया है।
विभागों की आपसी उलझन और प्रशासनिक देरी
सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता को भेजे गए एक हालिया बयान से यह खुलासा हुआ कि ₹3003.94 लाख की राशि का प्रस्ताव योजना विभाग को भेजा तो गया था। हालांकि, योजना विभाग ने इस प्रस्ताव पर कुछ आपत्तियां और सवाल उठाकर फाइल वापस शिक्षा सचिव को लौटा दी।
फिलहाल शिक्षा विभाग योजना विभाग द्वारा उठाए गए इन सवालों के जवाब तैयार करने में ही लगा हुआ है। विभागों के बीच पत्राचार और कागजी प्रक्रिया में हो रही इस देरी के कारण निर्माण कार्य अटका हुआ है, जिस पर हाईकोर्ट ने सख्त ऐतराज जताया है।
7 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अपनी कमियों और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने का अंतिम अवसर प्रदान किया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 7 सितंबर 2026 तय की है। खंडपीठ ने अपने रुख को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि यदि अगली सुनवाई की तिथि तक फंड जमा करने की पूरी प्रक्रिया संपन्न नहीं की जाती है, तो शिक्षा सचिव को स्वयं कोर्ट रूम में उपस्थित होकर इस अवहेलना का जवाब देना होगा।


















