Prajasatta Side Scroll Menu
Bahra University - Shimla Hills

Shimla News: ‘कागजों पर रची गई थी पूरी थ्योरी…’ ठियोग पुलिस की बुनी ‘कहानी’ पर HC के कड़े सवाल, चरस कांड में आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार

HP High Court NDPS Case: चरस तस्करी मामले में ठियोग पुलिस की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि पुलिस की कहानी में भारी विरोधाभास हैं और पूरा मामला थाने में बैठकर कागजों पर तैयार किया गया प्रतीत होता है।
Published on: 24 July 2026
Shimla News: 'कागजों पर रची गई थी पूरी थ्योरी...' ठियोग पुलिस की बुनी 'कहानी' पर HC के कड़े सवाल, चरस कांड में आरोपियों को बरी करने का फैसला बरकरार

Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने ठियोग पुलिस थाना के अंतर्गत वर्ष 2011 में दर्ज एक चरस तस्करी के मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया पर अत्यंत गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा दायर की गई अपील को खारिज कर दिया।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा सभी आरोपियों को बरी करने के पूर्व फैसले की पुष्टि की है।अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी की कि पुलिस द्वारा पेश की गई कहानी में इतनी विसंगतियां और विरोधाभास हैं कि उस पर रत्ती भर भी भरोसा नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने कहा कि साक्ष्यों को देखने से ऐसा प्रतीत होता है मानो पूरी कहानी थाने में बैठकर कागजों पर गढ़ दी गई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 18 फरवरी 2011 की शाम की है, जब सहायक उपनिरीक्षक की अगुवाई में पुलिस टीम ने ठियोग के छैला रोड पर गजेड़ी बाईपास के पास नाकाबंदी की थी। पुलिस का दावा था कि उसी दौरान छैला की तरफ से एक मोटरसाइकिल पर तीन लोग आते दिखाई दिए। तलाशी लेने पर मोटरसाइकिल पर बीच में बैठे आरोपी के पिट्ठू बैग से 1 किलो 700 ग्राम चरस बरामद की गई थी।

इस मामले की सुनवाई के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट शिमला ने 31 अगस्त 2012 को सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। राज्य सरकार और पुलिस ने हाईकोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि नाकेबंदी की जगह सुनसान थी तथा शाम के समय घना अंधेरा होने के कारण कोई भी स्वतंत्र गवाह उपलब्ध नहीं हो सका।

हालांकि, अदालत में प्रस्तुत गवाहियों से यह पूरी तरह साबित हो गया कि जिस जगह नाका लगाया गया था, वहां 5 से 6 दुकानें, रिहायशी मकान और ‘रोम पैलेस’ नाम का एक रेस्टोरेंट स्थित था। इसके अतिरिक्त, वह मार्ग अत्यंत व्यस्त था और लगातार वाहनों की आवाजाही हो रही थी। पुलिस का यह दावा कि फरवरी की कड़ाके की ठंड और अंधेरे में बिना रोशनी के इंतजाम के पूरी जब्ती और कागजी कार्रवाई सरकारी गाड़ी के बोनट पर की गई, अदालत की नजर में व्यावहारिक रूप से असंभव और अविश्वसनीय सिद्ध हुआ।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने फैसले में यह सिद्धांत दोहराया कि एनडीपीएस एक्ट के प्रावधान अत्यंत कड़े होते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में पुलिस की गवाही पूरी तरह से त्रुटिहीन और विश्वसनीय होनी चाहिए। इस मामले में पुलिस के बयानों में मौजूद विसंगतियों के संचयी प्रभाव ने पूरी जांच को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया।

अदालत ने कहा कि कानून का स्थापित नियम है कि यदि अभियोजन पक्ष के मामले में थोड़ा सा भी संदेह पैदा होता है, तो उसका सीधा लाभ आरोपियों को मिलना चाहिए। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बरी करने के फैसले को सही ठहराया।

Charas SmugglingHimachal High CourtHimachal NewsND&PS ActShimla Police

Join WhatsApp

Join Now