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Exclusive! हिमुडा की नाक के नीचे कोटबेजा स्कूल भवन के निर्माण में हुआ घटिया सामग्री का इस्तेमाल

Exclusive! हिमुडा की नाक के नीचे कोटबेजा स्कूल भवन के निर्माण में हुआ घटिया सामग्री का इस्तेमाल

प्रजासत्ता ब्यूरो |
Exclusive!: दूर के ढोल सुहावने और नया नौ दिन और पुराना सौ दिन की कहावत तो आपने सुनी ही होगी। यह कहावतें  सोलन जिला के कसौली तहसील के कोट बेजा में बने वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल के उस भवन पर सटीक बैठती है, जिसके भवन निर्माण पर जनता से टैक्स के रूप में एकत्रित किया गया करोड़ों रुपया खर्च किया गया। दूर से देखने पर यह स्कूल जितना सुन्दर नजर आता है। करीब से देखने पर उसके निर्माण में बड़े स्तर पर खामियां नज़र आती है।

दरअसल हिमुडा के निदेशन में निजी कंपनी द्वारा इस भवन का निर्माण करवाया गया है। लेकिन उद्घाटन के करीब 3 वर्षों के अन्दर ही स्कूल निर्माण में बड़े स्तर पर खामियां दिखनी शुरू हो गई है। जिससे काम की गुणवत्ता को लेकर स्वालिया निशान खड़े होने लगे हैं। उल्लेखनीय है कि स्कूल उद्घाटन हुए महज छ: माह ही बीते थे तब ही इस भवन में लगे खिडकियों और दरवाजों में दीमक लग गई थी।

बता दें कि करोड़ों की लागत से बने इस भवन का उद्घाटन दिसम्बर 2020 में पूर्व सीएम जयराम ठाकुर ने ऑनलाइन और पूर्व स्थानीय विधायक एवं मंत्री राजीव सैजल ने स्कूल भवन का निरिक्षण कर किया था। मगर इन्ही दो तीन सालों में स्कूल के बाहरी दीवारों के साथ अंदर की दीवारों से पलस्तर भुरना शुरू हो गया  है। ऐसा लगता है जैसे उसमे सीमेंट कम मात्रा में इस्तेमाल हुआ हो और उसकी कमी से दीवारों पर किए गए प्लस्टर से रेत भुर कर गिरने लगी है। स्कूल के बाहर की दीवारों पर इसका ज्यादातर असर देखने को मिल रहा है।

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इसके अलावा भवन निर्माण में खिड़कियाँ और दरवाजे भी सड़ने लगे हैं। जिसका कारण हल्की लकड़ी का इस्तेमाल है। गौरतलब है कि भवन निर्माण में इस्तेमाल की गई लकड़ी को दीमक लग जाने से उन्हें बदलना पड़ा है। पूर्व में एसएमसी प्रधान ने इस मामले को भी कई बार उठाया था लेकिन विभाग की तरफ से इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हिमुडा की तरफ से यहाँ काम करने के लिए कामगार भेजे गए लेकिन काम अधुरा छोड़ कर वह वापिस नहीं लौटे।

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वहीँ बुधवार को स्कूल में वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह के दौरान लोगों के बीच स्कूल निर्माण में हुई खामियों को लेकर चर्चा रही। लोगों के अनुसार निर्माण से बड़े स्तर पर कमीशन हडपने की बातें भी निकल कर सामने आई। क्योंकि सरेआम इतने बड़े स्तर पर स्कूल निर्माण में महज तीन सालों में ही खामिया नजर आने लगी है। लेकिन हिमुडा के अधिकारी यह सब जानकर देखकर चुप बैठे हैं।

वहीँ इस मामले पर स्कूल प्रधानाचार्य निरुपमा शर्मा का कहना है कि पहले भी स्कूल की खिडकियों को दीमक लगने की वजह से बदलवा दिया गया है। अभी कुछ भी कुछ काम अधुरा है। हिमुडा ने कर्मचारी भेजा था लेकिन वह काम को अधुरा छोड़ कर वापिस नहीं लौटा, इसके अलावा स्कूल भवन में कई जगह पलस्त छुटना शुरू हो गया है।

वहीँ इस मामले पर हिमुडा के एसडीओ राजेश चौहान से बात करनी चाही तो उनका मोबाइल नंबर बंद आया। इसके अलावा एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से भी संपर्क करना चाहा लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। 

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बता दें कि इस मामले को पहले भी मीडिया द्वारा उठाया जा चूका है, लेकिन हिमुडा विभाग इस मामले में भवन निर्माण करने वाली कंपनी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाया है। ऐसे में कई सवाल उठाना लाजमी है। कहीं अधिकारीयों की मिली भगत के चलते इस काम को लटकाया जा रहा है। अगर भवन निर्माण में गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल होता तो क्या वह महज कुछ ही सालों में इस तरह से ख़राब हो जाती, दीवारों से छुटती रेट खिड़कियों में दीमक लगाना निर्माण कार्य में हुई खामियों को दर्शाता है।

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